उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में 166 आरोपी भेजे गए जेल, झारखंड के 139 और बिहार के 20 अभ्यर्थी शामिल

Paper Leak: झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में 166 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. जांच में सॉल्वर गैंग द्वारा 10 लाख रुपये में सौदे और अभ्यर्थियों से ठगी का खुलासा हुआ. पुलिस लगातार छापेमारी कर नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में जेल जाते अभ्यर्थी. फोटो: प्रभात खबर

रांची से प्रणव की रिपोर्ट

Paper Leak: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 166 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों को सोमवार को रांची सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. इस कार्रवाई में झारखंड के 139 और बिहार के 20 अभ्यर्थी शामिल हैं, जिससे इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

10 लाख रुपये में होता था सौदा

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इस गैंग द्वारा अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के लिए 10 लाख रुपये तक वसूले जाते थे. इसमें तीन लाख रुपये अग्रिम लिए जाते थे, जबकि शेष सात लाख रुपये रिजल्ट आने के बाद देने की शर्त रखी जाती थी. इतना ही नहीं, गैंग के सदस्य अभ्यर्थियों से उनके मूल प्रमाण पत्र भी जमा करवा लेते थे, ताकि चयन के बाद कोई पैसा देने से पीछे न हट सके.

सॉल्वर गैंग का नेटवर्क और मास्टरमाइंड

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन अतुल वत्स कर रहा था, जो एक संगठित सॉल्वर गैंग का सरगना है. इसके अलावा क्रिस्टोपर नामक व्यक्ति को भी इस गिरोह का अहम सदस्य बताया जा रहा है, जिसने पूरी व्यवस्था तैयार की थी. रड़गगांव में निर्माणाधीन बिल्डिंग में अभ्यर्थियों को ठहराने और परीक्षा की तैयारी कराने की व्यवस्था ठेकेदार की मिलीभगत से की गई थी.

कई राज्यों तक फैला गिरोह

इस मामले में कई राज्यों के आरोपी शामिल हैं. प्रमुख आरोपियों में पटना के विकास कुमार, जहानाबाद के अतुल वत्स, रामगढ़ के आशीष कुमार और योगेश प्रसाद, तथा पूर्वी चंपारण के मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह शामिल हैं. इसके अलावा रांची और आसपास के इलाकों से भी कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें विनोद कुमार, गौरव सिंह, रमीज अंसारी और इल्फाज खान शामिल हैं. पुलिस ने पटना से चुलबुल यादव को भी गिरफ्तार कर रांची लाया है.

एजेंटों के जरिए अभ्यर्थियों को फंसाता था गैंग

जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह गिरोह एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाता था. उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने और प्रश्न पत्र हू-ब-हू मिलने का लालच दिया जाता था. इसके बाद तय स्थानों पर बुलाकर उन्हें उत्तर रटवाए जाते थे. इस तरह गैंग बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों के साथ ठगी करता था.

पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी

गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर रांची पुलिस लगातार अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. पुलिस का मानना है कि इस मामले में अभी और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. प्रशासन इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है.

झारखंड के गिरफ्तार अभ्यर्थी

  • गिरिडीह: 36
  • हजारीबाग: 32
  • चतरा: 08
  • रामगढ़: 03
  • रांची: 15
  • गोड्डा: 01
  • पलामू: 10
  • गढ़वा: 02
  • देवघर: 04
  • लोहरदगा: 01
  • कोडरमा: 07
  • बोकारो: 04
  • जमशेदपुर: 01
  • सरायकेला: 01
  • लातेहार: 01

बिहार के गिरफ्तार अभ्यर्थी

  • भोजपुर: 06
  • रोहतास: 01
  • बक्सर: 03
  • औरंगाबाद: 02
  • वैशाली: 01
  • नालंदा: 02
  • अरवल: 01
  • पटना: 02
  • गयाजी: 01
  • भागलपुर: 01

पेपर लीक करने में झारखंड के छात्र

  • जमशेदपुर के एक छात्र: रिंदू कुमार राय
  • सरायकेला के एक छात्र: पिन्दु महतो
  • लातेहार के एक छात्र: अंकित कुमार पासवान

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बिहार के विभिन्न जिलों के 20 छात्र

शशिकांत (भोजपुर), दीपक कुमार (भोजपुर), अरूण कुमार (रोहतास), शुभम कुमार (भोजपुर), राकेश तिवारी (भोजपुर), लाल बाबू कुमार (भोजपुर) और रवि कुमार सिंह (भोजपुर), अभिषेक राय (बक्सर), सुजीत कुमार (बक्सर), अरविन्द कुमार (बक्सर), ललेश कुमार (औरंगाबाद), सरोज कुमार (औरंगाबाद), लवकुश कुमार (पटना), शिवम कुमार (वैशाली), अंकित कुमार (पटना), प्रिय अमन कुमार (गया), बादल पासवान (भागलपुर), अमन कुमार (अरवल), उत्तम कुमार (नालंदा), विक्की कुमार (नालंदा).

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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