रांची से विपिन सिंह की रिपोर्ट
Ranchi News, रांची: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बेहतर और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने के लिए राज्य के कुल 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है. आपातकालीन चिकित्सा के लिए मरीजों को सीधे बड़े जिला अस्पतालों या रिम्स रेफर करने की निर्भरता खत्म हो जाएगी.इन केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की न्यूनतम व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.
पहले चरण में 20 सीएचसी का होगा कायाकल्प
पहले चरण में चुने गए 20 सीएचसी को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके अनुभवों के आधार पर शेष 168 स्वास्थ्य केंद्रों का चरणबद्ध तरीके से कायाकल्प होगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सोमवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी), नई दिल्ली की ओर से एक विशेष ऑनलाइन ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
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आईपीएचएस मानतो पर तैयार होगा अस्पताल
मातृत्व सेल की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ पुष्पा ने बताया कि सभी चयनित स्वास्थ्य केंद्रों को आईपीएचएस मानकों के तहत तैयार किया जाएगा. इसके तहत इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को 50% से 80% तक अपग्रेड किया जाएगा ताकि ये केंद्र पूरी तरह से क्रियाशील हो सके.
गैप एनालिसिस से कमियों का लगाया जाएगा पता
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने इन स्वास्थ्य केंद्रों में कमियों का पता लगाने के लिए एक व्यापक ‘गैप एनालिसिस करने का निर्देश दिया है. गैप एनालिसिस की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर कर इन्हें नेशनल सर्टिफिकेशन के लिए तैयार किया जाएगा.
फर्स्ट रेफरल यूनिट में चौबीसों घंटे इमरजेंसी उपलब्ध
आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह ने बताया कि एक सामान्य समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के के मुकाबले फर्स्ट रेफरल यूनिट में चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होती हैं. इसके शुरू होने से ग्रामीण स्तर पर इन केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की न्यूनतम व्यवस्था के साथ ही जटिल प्रसव और सिजेरियन (सिजेरियन सेक्शन) की सुविधा मिल सकेगी.
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