झारखंड अलकतरा घोटाला: 29 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रांसपोर्टर विनय सिन्हा समेत 4 को 3-3 साल की जेल

Jharkhand Alkatra Ghotala: रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने 29 साल पुराने अलकतरा घोटाला मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. हल्दिया से बरही तक अलकतरा की फर्जी सप्लाई दिखाकर सरकारी राशि हड़पने के इस खेल में अदालत ने आर्थिक दंड भी लगाया है. हालांकि, तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया.

Jharkhand Alkatra Ghotala, रांची (अजय दयाल की रिपोर्ट): सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने शुक्रवार को झारखंड और बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाला मामले में अहम फैसला सुनाया. अदालत ने 29 साल पुराने इस मामले में चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल साधारण कारावास की सजा सुनायी है. सजा पाने वालों में मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, आशीष मैटे, राजकुमार राय और रंजन प्रधान शामिल हैं. अदालत ने इन सभी पर आर्थिक दंड भी लगाया है.

साक्ष्य के अभाव में तीन बरी, दो की ट्रायल के दौरान मौत

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल नौ आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे. सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य आरोपियों- एके दास, एसएम औरंगजेब और एनसी प्रसाद को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण अदालत ने बरी कर दिया. सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने 35 गवाहों को पेश कर भ्रष्टाचार की कड़ियों को साबित किया.

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फर्जीवाड़े का तरीका: कागजों पर हुई सप्लाई

लोक अभियोजक के अनुसार, यह घोटाला अलकतरा आपूर्ति के तीन सप्लाई ऑर्डर से जुड़ा था. नियम के मुताबिक, हल्दिया (पश्चिम बंगाल) से बरौनी होते हुए अलकतरा को एनएच बरही तक लाया जाना था. लेकिन जांच में पाया गया कि ट्रांसपोर्टर ने बरौनी में किसी को कोई रिपोर्ट नहीं की और फर्जी भाड़ा बिल जमा कर राशि की निकासी कर ली. तीनों ऑर्डर में भारी मात्रा में कम सप्लाई के बावजूद कागजों पर पूरी सप्लाई दिखाकर करोड़ों का हेरफेर किया गया था.

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई थी जांच

यह मामला सामने आने के बाद झारखंड हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच की कमान संभाली थी. गौरतलब है कि इसी घोटाले के एक अन्य मामले में मार्च 2025 में बिहार के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन को भी तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय बाद आया यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है.

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Published by: Sameer Oraon

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