Ranchi news : 2018 से लेकर अब तक जेल या न्यायिक हिरासत में कितनी मौत हुई हैं : हाइकोर्ट

हाइकोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को फिर से शपथ पत्र दायर करने का दिया निर्देश

हाइकोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को फिर से शपथ पत्र दायर करने का दिया निर्देश

-मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी.

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने जेल व न्यायिक हिरासत में हुई मौतों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान गृह विभाग के प्रधान सचिव की ओर से दायर शपथ पत्र को देखा. खंडपीठ ने कहा कि प्रधान सचिव ने अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हिरासत में माैत के सभी मामलों में चाहे वह जेल में हो या न्यायिक हिरासत में, माैत का तथ्य मजिस्ट्रेट के संज्ञान में लाया गया था. हालांकि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि मजिस्ट्रेट द्वारा सीआरपीसी की धारा 176 या बीएनएसएस- 2023 की धारा 196 के तहत कोई जांच की गयी थी या नहीं. वैसी स्थिति में वर्ष 2018 से लेकर अब तक हुई ऐसी मौतों के संबंध में खंडपीठ ने प्रधान सचिव को तीन सप्ताह के भीतर एक नया शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व कोर्ट के आदेश के आलोक में प्रधान सचिव की ओर से शपथ पत्र दायर कर जानकारी दी गयी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी मुमताज अंसारी ने जनहित याचिका दायर की है. हिरासत में हुई मौत के प्रत्येक मामले में न्यायिक जांच करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है. प्रार्थी ने राज्य विधानमंडल के एक दस्तावेज़ का हवाला दिया है, जिसमें राज्य सरकार ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि 2018 और 2021 के बीच झारखंड राज्य में लगभग 166 मौतें हिरासत में हुई हैं.

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Published by: Deepesh kumar

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