रांचीः खलारी कोयलांचल के जेहलीटांड़ क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बार फिर भू-धंसान की घटना से हड़कंप मच गया. ग्रामीण दामोदर गंझू के घर के समीप बाड़ी में अचानक तेज आवाज के साथ जमीन काफी गहराई तक धंस गयी. धंसी जमीन कुएं के आकार के गहरे गड्ढे में बदल गयी. ग्रामीणों के अनुसार, गड्ढे से भूमिगत कोयले की आग का जहरीला और दमघोंटू धुआं भी निकल रहा था.
घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भय का माहौल है. भुक्तभोगी परिवार के अनुसार, कई वर्ष पहले भी दामोदर गंझू के घर के अंदर स्थित बगान में भू-धंसान हुआ था. रिहायशी इलाके में बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से ग्रामीण किसी बड़ी अनहोनी को लेकर चिंतित हैं.
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सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा केडीएच प्रबंधन
घटना की सूचना ग्रामीणों ने तत्काल केडीएच परियोजना प्रबंधन को दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए केडीएच के परियोजना पदाधिकारी बिमल कुमार और मैनेजर राघवेंद्र गांधी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने धंसान स्थल का निरीक्षण किया. इसके बाद प्रबंधन ने जेसीबी की मदद से गहरे गड्ढे और मलबे को भरकर जमीन को समतल कराया.
विश्रामपुर से जेहलीटांड़ तक लगातार हो रहा भू-धंसाव
ग्रामीणों के अनुसार, चालू खदान के बिल्कुल नजदीक दर्जनों रैयतों के मकान हैं. मानसून के दौरान लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन के अंदर पानी जाने से भू-धंसाव की घटनाएं बढ़ रही हैं.
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हाल ही में करकट्टा कॉलोनी स्थित विश्रामपुर बस्ती निवासी शिवनाथ गंझू के घर के समीप तीन से चार बार भू-धंसाव हो चुका है. इससे पहले जेहलीटांड़ में संजय गंझू के मकान के पास भी ड्रम कुएं के आकार का गड्ढा बन गया था. विश्रामपुर और जेहलीटांड़ में लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है.
ग्रामीणों का कहना है कि केवल धंसी जमीन को मिट्टी से भरकर समतल कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. उन्होंने प्रभावित आबादी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अविलंब सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है. साथ ही भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का तकनीकी सर्वेक्षण कर स्थायी सुरक्षा उपाय करने की भी मांग की है.
