जीएसटी धोखाधड़ी मामले में झारखंड, बंगाल और महाराष्ट्र में कई ठिकानों पर ईडी के छापे

ED Raids : जीएसटी धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने 3 राज्यों के 12 ठिकानों पर छापेमारी की है. ईडी ने झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी छापेमारी की है. इस मामले में एक बार पहले भी ईडी ने तलाशी ली थी. इस बार विश्वसनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, ऐसा ईडी का कहना है.

ED Raids: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 750 करोड़ रुपए के ‘फर्जी’ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चालान बनाने के मामले में झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में फिर छापेमारी की है. धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 3 राज्यों में कम से कम एक 12 परिसरों पर छापेमारी की गयी.

रांची, जमशेदपुर में 8 ठिकानों पर ईडी की रेड

ईडी की टीमें झारखंड में सबसे ज्यादा 8 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम राजधानी रांची और जमशेदपुर में इन ठिकानों पर छापेमारी के लिए पहुंची है. जहां-जहां टीम ने छापेमारी की है, सभी के गेट बंद कर दिये गये हैं. बाहर के लोगों का घर के अंदर प्रवेश और अंदर के लोगों का बाहर जाने पर रोक लगा दी है.

कोलकाता के साल्ट लेक और अलीपुर में छापे

पश्चिम बंगाल के साल्टलेक और अलीपुर में भी ई़डी का ऑपरेशन जारी है. ईडी टीम के साथ सीएपीएफ के जवान भी हैं. फिलहाल केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने अभियान को लेकर कुछ भी कहने से इंकार किया है.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

750 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा है केस

मामला झारखंड में मुखौटा कंपनियों और अवैध वित्तीय लेन-देन के माध्यम से 750 करोड़ रुपए के ‘फर्जी’ इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बनाने से जुड़ा है. कोलकाता में साल्टलेक समेत 2 जगहों पर छापेमारी चल रही है, जबकि महाराष्ट्र में भी 2 जगह ईडी की कार्रवाई चल रही है.

शिव कुमार देवड़ा की गिरफ्तारी से हुई केस की शुरुआत

सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच की शुरुआत इसके ‘मुख्य साजिशकर्ता’ शिव कुमार देवड़ा की गिरफ्तारी से हुई. उसे मई 2025 में गिरफ्तार किया गया था और पिछले महीने उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया.

विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर की जा रही छापेमारी

वर्तमान में की जा रही तलाशी ‘विश्वसनीय साक्ष्यों’ के आधार पर की जा रही है, जो कई व्यक्तियों और कंपनियों की ‘अपराध से अर्जित आय’ के धनशोधन में संलिप्तता को दर्शाती है. इस मामले में ईडी ने पहली बार मई में तलाशी ली थी.

ईडी के अफसरों ने बतााय है कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गयी. मामला शेल कंपनियों और अवैध वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से फर्जी इनवॉयस तैयार कर अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का दावा करने और काले धन को वैध बनाने से जुड़ा है.

शिव कुमार देवड़ा है घोटाले का मास्टरमाइंड

इस घोटाले का मास्टरमाइंड शिव कुमार देवड़ा है, जिसे मई में गिरफ्तार किया गया था. पिछले महीने ही इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया है. देवड़ा और उसके सहयोगियों ने लगभग 5,000 करोड़ रुपए के फर्जी इनवॉयस तैयार किये, जिससे 730 करोड़ रुपए से अधिक का अवैध आइटीसी क्लेम किया गया.

कई नये लोगों की संलिप्तता आयी है सामने – ईडी

ईडी की ताजा छापेमारी में कई नये व्यक्तियों और संस्थाओं की संलिप्तता सामने आयी है. इन संस्थाओं पर अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और उसे परत दर परत छिपाने में मदद की, ऐसा ईडी को संदेह है.

ईडी के छापों का क्या है मकसद?

ईडी के तलाशी अभियान का मकसद अवैध धन के नेटवर्क को उजागर करना, मुख्य लाभार्थियों की पहचान करना और ठोस सबूत जब्त करना है. सॉल्टलेक और अलीपुर में हुई छापेमारी के दौरान भी ईडी अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को जब्त किया है. हालांकि, अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गयी है.

इसे भी पढ़ें

Very Heavy Rain Alert: पलामू, गढ़वा और चतरा में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी, 9 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट

IIM रांची में शिक्षा का नया मॉडल, अब मिड टर्म एग्जाम नहीं, ‘AI प्रोजेक्ट’ होंगे जरूरी

धनबाद का कुख्यात अपराधी छोटू सिंह STF के साथ मुठभेड़ में ढेर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >