रांची: भागदौड़ की जिंदगी में परिवार बिखर रहे हैं और आपस का भावनात्मक लगाव कम होता जा रहा है. एकल परिवारों का बढ़ता चलन और सोशल मीडिया का प्रभाव रिश्तों में दूरी बढ़ा रहा है. बदलती सामाजिक व्यवस्था, परिवारों में बढ़ता तनाव, रोजगार की अनिश्चितता और सामाजिक जटिलताओं का असर झारखंड पर साफ दिख रहा है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य में कुल 1991 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 1412 पुरुष (71%) और 579 महिलाएं शामिल हैं. आंकड़ों से स्पष्ट है कि आत्महत्या केवल व्यक्तिगत संकट नहीं, बल्कि सामाजिक व आर्थिक दबाव का संकेत है.
पारिवारिक विवाद और बेरोजगारी मुख्य कारण
आत्महत्या के पीछे सबसे बड़ा कारण पारिवारिक समस्याएं (551 मामले) रहीं. इसके बाद शादी संबंधी विवाद के 388 मामले (136 शादी तय न होना, 99 दहेज, 95 वैवाहिक तनाव और 54 तलाक) दर्ज किये गये. प्रेम संबंधों में विफलता के कारण 282 लोगों ने जान गंवायी. आर्थिक मोर्चे पर बेरोजगारी के कारण 193, गरीबी से 32, करियर के तनाव से 26 और दिवालिया होने से आठ मामले सामने आये. बीमारी और मानसिक परेशानी से जुड़े 179 मामलों में 83 मानसिक तनाव, 41 कैंसर, 26 असाध्य बीमारी, 16 विकलांगता और 51 मामले नशे की लत से संबंधित थे.
कम आय वर्ग, बेरोजगार व छात्र अधिक प्रभावित
व्यवसाय और वर्ग के आधार पर सबसे अधिक 928 बेरोजगारों, 369 विद्यार्थियों, 247 गृहिणियों, 297 वेतनभोगियों और 224 निजी कर्मचारियों ने यह कदम उठाया. विद्यार्थियों में 78 मामले परीक्षा में असफलता से जुड़े थे. आय वर्ग की बात करें तो सालाना 1 लाख रुपये से कम आय वाले वर्ग में सर्वाधिक 1,541 आत्महत्याएं हुईं. एक से पांच लाख आय वर्ग में 394, पांच से 10 लाख में 48 और 10 लाख से अधिक आय वर्ग में आठ मामले दर्ज हुए.
पांच वर्षों के आंकड़े
- वर्ष 2020 : 2144वर्ष 2021 : 1825
- वर्ष 2022 : 2181वर्ष 2023 : 2006
- वर्ष 2024 : 1991
लक्षण पहचानें और मदद करें
व्यक्ति में आत्मघाती विचार आना, स्वयं को दोषी या दूसरों पर बोझ मानना, सोशल मीडिया पर नकारात्मक संदेश पोस्ट करना, व्यवहार में अचानक बदलाव, नींद/खान-पान में गड़बड़ी और नशे का सेवन बढ़ना इसके मुख्य संकेत हैं. ऐसे समय में व्यक्ति की बात धैर्यपूर्वक सुनें, उसे अकेला न छोड़ें, संवाद बनायें और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
रिनपास के पूर्व निदेशक डॉ अमूल रंजन सिंह ने जानकारी साझा करते हुए कहा, 'संयुक्त परिवार का बिखराव और एकल परिवारों में संवाद की कमी से लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं. सोशल मीडिया ने भी दूरियां बढ़ायी हैं. पीड़ित व्यक्ति के व्यावहारिक संकेतों को पहचानकर समय पर मनोचिकित्सक से परामर्श दिलाना बेहद आवश्यक है.'
इन नंबरों पर पायें तुरंत मदद
- हेल्पलाइन नंबर (रिनपास) : 9431136697.
- टोल फ्री नंबर : 14499, 18003454060.
