CUJ National Seminar: सीयूजे में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन, प्रो अरविंद चंद्र पांडेय ने की सराहना

CUJ National Seminar: सीयूजे में क्लीन एनवायरमेंट इनविजन्ड टुवर्ड्स विकसित भारत विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार बुधवार को संपन्न हो गया. प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संकाय के पूर्व संकाय प्रमुख प्रो अरविंद चंद्र पांडेय ने इसकी सराहना की.

By Guru Swarup Mishra | March 12, 2025 10:56 PM

CUJ National Seminar: रांची-सीयूजे में बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया. क्लीन एनवायरमेंट इनविजन्ड टुवर्ड्स विकसित भारत विषय पर आयोजित सेमिनार के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संकाय के पूर्व संकाय प्रमुख प्रो अरविंद चंद्र पांडेय ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि ये सेमिनार काफी सकारात्मक पहल है. इसमें पर्यावरण की मौजूदा समस्याओं और समाधान पर दो दिनों तक विमर्श हुआ. इस सेमिनार में विज्ञान आधारित समाधान निकले, जिसका उपयोग वैज्ञानिक, नीति निर्माता और आम जनता कर सकते हैं.

राष्ट्रीय सेमिनार में 50 पेपर प्रस्तुत किए गए


आईक्यूएसी के डायरेक्टर प्रो रतन कुमार डे विशिष्ट अतिथि के तौर पर सत्र में माजूद थे. उन्होंने विभाग के कार्य को सराहा. समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो मनोज कुमार (संकायाध्यक्ष, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संकाय) ने की. उन्होंने मुख्य अतिथि और सभी आगंतुकों का स्वागत किया. उन्होंने विभाग की गतिविधियों और सफल प्रयोगों के बारे में जानकारी दी. प्रो भास्कर सिंह (संगोष्ठी के संयोजक और विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग) ने दो दिनों की इस संगोष्ठी की रिपोर्ट पेश की. उन्होंने बताया कुल 50 पेपर पिछले दो दिनों में प्रस्तुत हुए. कई प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रतिभागी और विद्वानों ने भाग लिया. सीएसआईआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, आईसीएफआरई-इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, बीआईटी मेसरा, इग्नू, केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार और रांची विश्वविद्यालय.

राष्ट्रीय सेमिनार की सराहना


कई प्रतिभागियों ने इस आयोजन को सफल बताया और सीयूजे और पर्यावरण विभाग को सराहा. स्वागत भाषण डॉ अनुराग लिंडा (सह प्राध्यापक, पर्यावरण विभाग) धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुशील शुक्ला (सहायक प्राध्यापक, पर्यावरण विभाग) और समन्वयन डॉ निर्मली बोरदोलोई (सहायक प्राध्यापक, पर्यावरण विभाग) ने किया.

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