यात्रा से होटल बुकिंग तक, एआइ कैसे बदल रहा पर्यटन का तरीका; सीयूजे की डॉ रचना जायसवाल ने किया अध्ययन

केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड की डॉ रचना जायसवाल का शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है. यह शोध पर्यटन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और यात्रियों की ज़रूरतों को एकीकृत करने की संभावनाओं पर केंद्रित है.

रांची. केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रचना जायसवाल का शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल करेंट इश्यूज इन टूरिज्म में प्रकाशित हुआ है. यह जर्नल एबीडीसी-ए श्रेणी और स्कोपस क्यू-वन में शामिल है. जर्नल का इंपैक्ट फैक्टर 6.0 है.

डॉ रचना जायसवाल ने अपने शोध में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन किया है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पर्यटन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए लोग एआइ चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, सामान्य चैटबॉट एक समय में सीमित जानकारी या सहायता उपलब्ध करा सकते हैं.

शोध में एमएटीएसएस की अवधारणा को इससे आगे की व्यवस्था के रूप में देखा गया है. इसके माध्यम से यात्रा की योजना बनाने, होटल या अन्य आवास खोजने, परिवहन की व्यवस्था करने और बुकिंग जैसी अलग-अलग जरूरतों को एक साथ संभालने की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है.

डॉ जायसवाल का शोध पर्यटन क्षेत्र में एआइ आधारित तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और यात्रियों की विभिन्न जरूरतों को एकीकृत तरीके से पूरा करने की संभावनाओं पर केंद्रित है.

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By संजीव कुमार

संजीव कुमार सिंह, वर्तमान में प्रभात खबर, रांची में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. वह 14 वर्षों (2005 से 2019) तक प्रभात खबर रांची में मुख्य संवाददाता रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का अनुभव है. लंबे पत्रकारिता जीवन में खोजी, विश्लेषणात्मक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं. प्रभात खबर द्वारा बेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड भी दिया गया. इनकी विशेष पहचान झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों व प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के बाद सिविल सेवा, व्याख्याता, इंजीनियर, जैसी नियुक्तियों में गड़बड़ी को उजागर किया.

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