राज्यसभा चुनाव के बाद भाकपा माले का कांग्रेस पर हमला, झारखंड के साथ विश्वासघात का लगाया आरोप

Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद भाकपा माले ने कांग्रेस पर झारखंड और इंडिया गठबंधन के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया. पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप और कार्रवाई की अपील की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से बिपिन सिंह की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में इंडिया गठबंधन के दूसरे उम्मीदवार और कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है. इसी कड़ी में भाकपा माले ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीतिक गरिमा पर गंभीर आघात है. पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. रांची स्थित महेंद्र सिंह भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भाकपा माले नेताओं ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलता की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सहयोगी दलों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस ने झारखंड के साथ किया विश्वासघात: मनोज भक्त

भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के बयान के अगले दिन आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ इंडिया गठबंधन के साथ ही नहीं, बल्कि झारखंड की जनता के साथ भी विश्वासघात किया है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एवं इंडिया गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन को लिखे गए पत्र और प्रेस वार्ता के माध्यम से पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि गठबंधन के निर्णय के अनुरूप भाकपा माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था. मनोज भक्त ने कहा कि मतदान के बाद पार्टी के प्रतिनिधियों ने मतपत्रों का सत्यापन भी किया था और सब कुछ सही पाया गया था. ऐसे में चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा भाकपा माले और राजद पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं.

कांग्रेस पर पहले से साजिश रचने का आरोप

राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं और उसके पोलिंग एजेंट द्वारा सहयोगी दलों पर आरोप लगाना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर पहले से ही किसी तरह की रणनीति बनाई गई थी और हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की तैयारी कर ली गई थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने विधायकों के मतदान की सच्चाई सार्वजनिक करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर झारखंड की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने वाला यह राजनीतिक खेल क्यों खेला गया. उनके अनुसार यह केवल गठबंधन के साथ धोखा नहीं, बल्कि पूरे राज्य के साथ विश्वासघात है. राजनीति में जब समीकरण बिगड़ते हैं, तब सहयोगी दल अक्सर ऐसे व्यवहार करते हैं मानो वर्षों की दोस्ती कभी थी ही नहीं. चुनावी अंकगणित का दोष भी अंततः किसी न किसी पर डालना ही पड़ता है.

2022 की घटना का भी किया जिक्र

भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्यसभा चुनाव में पोलिंग एजेंट रहे हलधर महतो ने वर्ष 2022 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कांग्रेस के कुछ विधायक नकदी के साथ पकड़े गए थे और राज्य सरकार को अस्थिर करने के आरोप सामने आए थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अंदर मौजूद विरोधाभास और नेताओं के सार्वजनिक बयान पार्टी के अवसरवादी चरित्र को उजागर करते हैं. हलधर महतो ने दावा किया कि भाकपा माले जनसंघर्षों की राजनीति करती है और उसके नेताओं को पद या धन के लालच से नहीं खरीदा जा सकता.

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मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग

प्रेस वार्ता में मौजूद केंद्रीय कमेटी सदस्य गीता मंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि झारखंड को कलंकित करने वाली गतिविधियों के लिए कांग्रेस को स्पष्ट चेतावनी दी जानी चाहिए. गीता मंडल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता और मंत्री जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली ताकतों के करीब हैं, जिससे राज्य में भाजपा विरोधी एकता और जनपक्षधर राजनीति कमजोर हो रही है. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक और कॉरपोरेट ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और किसी भी परिस्थिति में इस लड़ाई से समझौता नहीं किया जाएगा. राज्यसभा चुनाव के बाद महागठबंधन के भीतर बढ़ती तल्खी अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में और भी हलचल देखने को मिल सकती है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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