रांची. सदन में मंगलवार को विभिन्न शिक्षण संस्थानों को केंद्रीय एजेंसी एआइसीटीइ व यूजीसी से वर्षों से मान्यता नहीं मिलने का मामला उठा. चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं सदन में एक सुझाव रखना चाहता हूं. राज्य में इंडिया गठबंधन की सरकार है और केंद्र में विपक्ष की सरकार है. आने वाली पीढ़ी के भविष्य की बात है. कहीं न कहीं विपक्ष की भी जवाबदेही है कि राज्य के शिक्षण संस्थानों को केंद्रीय एजेंसी से मान्यता मिले. राज्य सरकार के साथ विपक्ष के सांसद भी इस मामले को केंद्र तक पहुंचायें. ऐसा करने से राज्य के लिए एक अच्छी परंपरा की शुरुआत होगी.
एआइसीटीइ स्वतंत्र एजेंसी है : बाबूलाल
इस पर प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एआइसीटीइ स्वतंत्र एजेंसी है. राज्य सरकार कह रही है कि 2022 से मान्यता का प्रयास कर रहे हैं. राज्य सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है. प्रभारी प्राचार्य अभी नियुक्त किये गये हैं. पूरे राज्य में यही हाल है. सरकार बताये कि कितना गंभीर प्रयास हुआ है. यह कहना कि बीजेपी साथ नहीं दे रही है, गलत है. विभागीय मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि राज्य सरकार पठन-पाठन शुरू करना चाहती है. ये भारत सरकार की संस्था है. राज्य सरकार ने 2022 से कितनी बार प्रयास किया है, इसकी फाइल भेज देते हैं, देख लें. विधायक अपने साथ भाजपा सांसद को ले जाकर बात कर लें और पता लगा लें कि गतिरोध कहां है.
सुसारन होरो ने उठाया मुद्दा
दरअसल झामुमो विधायक झीगा सुसारन होरो ने सिसई में एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में पठन-पाठन शुरू नहीं होने का मामला उठाया था. विधायक श्री होरो का कहना था कि कॉलेज भवन बनकर तैयार है. 2022-23 से यह सवाल लेकर आ रहा हूं, हर बार बताया जाता है कि एआइसीटीइ से मान्यता नहीं मिली है. सरकार बताये कि मान्यता कब तक मिलेगी. मंत्री सुदिव्य का कहना था कि जैसे ही मान्यता मिल जायेगी, आने वाले सत्र में पढ़ाई शुरू कर देंगे. हमें केवल एआइसीटीइ के अनुमोदन का इंतजार है. एआइसीटीइ से पत्राचार किया जा रहा है.
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