चतरा नगर परिषद अध्यक्ष की पात्रता पर उठे सवाल, झारखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Jharkhand High Court: चतरा नगर परिषद अध्यक्ष अताऊर रहमान की चुनावी पात्रता को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव से जवाब मांगा है. याचिका में शपथ-पत्र में बच्चों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया गया है. मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: चतरा नगर परिषद के अध्यक्ष अताऊर रहमान की निर्वाचन पात्रता को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से विस्तृत जवाब तलब किया है. मामले में आरोप लगाया गया है कि नगर निकाय चुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते समय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे अताऊर रहमान ने अपने शपथ-पत्र में तथ्यों को छिपाया और अपने बच्चों की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी. हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर स्पष्टीकरण मांगा है.

शपथ-पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप

यह मामला चतरा निवासी राजेश कुमार द्वारा दायर रिट याचिका W.P.(C) No. 3880 of 2026 से जुड़ा हुआ है. याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2026 के नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करते समय अताऊर रहमान ने अपने शपथ-पत्र में केवल दो बच्चों का उल्लेख किया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि वास्तविकता में उनके दो से अधिक जीवित बच्चे हैं. याचिका में कहा गया है कि यह तथ्य जानबूझकर छिपाया गया, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित हुई और चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ.

दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों की पात्रता पर सवाल

याचिका में झारखंड सरकार द्वारा अधिसूचित उन नियमों का उल्लेख किया गया है, जिनके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले व्यक्ति को नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जा सकता है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल गलत जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्वाचन पात्रता से जुड़ा गंभीर कानूनी प्रश्न बन जाएगा. याचिका के अनुसार, चुनावी शपथ-पत्र में उम्मीदवार द्वारा दी गई प्रत्येक जानकारी कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होती है और मतदाताओं के साथ-साथ निर्वाचन आयोग भी इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उम्मीदवार की पात्रता का मूल्यांकन करता है.

विभाग को पहले भी दी गई थी शिकायत

राजेश कुमार ने अपनी याचिका में बताया है कि उन्होंने इस मामले को लेकर 16 मार्च 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के साथ शपथ-पत्र और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए थे. उन्होंने विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना है कि शिकायत दिए जाने के बाद भी लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को विधिक नोटिस भी भेजा गया, लेकिन कथित तौर पर उस पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.

प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचे हाईकोर्ट

जब विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब याचिकाकर्ता ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिका में राज्य सरकार सहित कई अधिकारियों और संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है. मामले में झारखंड के मुख्य सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, चतरा के उपायुक्त तथा नगर परिषद अध्यक्ष अताऊर रहमान को पक्षकार बनाया गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती, तो उन्हें न्यायालय की शरण में नहीं जाना पड़ता.

न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने पक्ष रखा और न्यायालय के समक्ष आरोपों से संबंधित तथ्य प्रस्तुत किए. प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि याचिका में लगाए गए आरोपों पर शपथ-पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल किया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और आरोपों की स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक है.

छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित विभाग को जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है. इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई भी छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है. अब सभी की निगाहें विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका प्रभाव न केवल संबंधित निर्वाचित पदाधिकारी पर पड़ सकता है, बल्कि यह मामला नगर निकाय चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा दिए जाने वाले शपथ-पत्रों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दे सकता है.

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चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है. चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है. ऐसे में झारखंड हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही यह सुनवाई आने वाले समय में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियमों की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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