CareEdge Rating: केयरएज रेटिंग में बिहार से ऊपर झारखंड, जानें किस नंबर पर है अपना राज्य

CareEdge State Rating News: एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बिहार 34.8 के समग्र सूचकांक के साथ 17वें स्थान पर रहा, जो झारखंड और मध्यप्रदेश से थोड़ा पीछे है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के दक्षिणी राज्यों ने आर्थिक, वित्तीय विकास, पर्यावरण और शासन मापदंडों पर अच्छा प्रदर्शन किया.

CareEdge State Rating News: वर्ष 2025 के लिए केयरएज की समग्र रैंकिंग जारी कर दी गयी है. इस रैंकिंग में झारखंड ने बिहार को पीछे छोड़ दिया है. राज्यों की समग्र रैंकिंग में महाराष्ट्र अव्वल है, तो बिहार 17वें स्थान पर. इस लिस्ट में झारखंड और बिहार से सटा राज्य पश्चिम बंगाल 13वें स्थान पर है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयरएज ने कहा है कि देश के बड़े राज्यों में महाराष्ट्र शीर्ष रैंकिंग पर रहा. इस रैंकिंग में गुजरात को दूसरा, कर्नाटक को तीसरा, तेलंगाना को चौथा और तमिलनाडु को पांचवां स्थान मिला है.

इन 7 बिंदुओं पर जारी होती है केयरएज स्टेट रैंकिंग

केयरएज स्टेट रैंकिंग को 7 प्रमुख बिंदुओं को समाहित करते हुए जारी किया जाता है. इसमें आर्थिक, राजकोषीय, बुनियादी ढांचा, वित्तीय विकास, सामाजिक, शासन और पर्यावरण के पहलू शामिल हैं. केयरएज ने कहा कि राज्यों की समग्र रैंकिंग में महाराष्ट्र 56.5 के समग्र सूचकांक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि पश्चिम बंगाल कुल 17 बड़े राज्यों में से 38.9 अंक के साथ 13वें स्थान पर रहा. झारखंड को एजेंसी की रेटिंग में 36 समग्र सूचकांक के साथ 16वें स्थान पर रखा गया है.

34.8 अंक के साथ लिस्ट में बिहार 17वें स्थान पर

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बिहार 34.8 के समग्र सूचकांक के साथ 17वें स्थान पर रहा, जो झारखंड और मध्यप्रदेश से थोड़ा पीछे है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के दक्षिणी राज्यों ने आर्थिक, वित्तीय विकास, पर्यावरण और शासन मापदंडों पर अच्छा प्रदर्शन किया.

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छोटे राज्यों में गोवा अव्वल राज्य

छोटे, पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में से गोवा वित्तीय विकास, बुनियादी ढांचे, सामाजिक, आर्थिक एवं राजकोषीय मापदंडों में अच्छे अंक के साथ सबसे आगे रहा. बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर पश्चिम बंगाल बड़े राज्यों की श्रेणी में आठवें स्थान पर रहा, जबकि पंजाब शीर्ष पर और उसके बाद हरियाणा और तेलंगाना का स्थान रहा.

रैंकिंग के लिए केयरएज ने राज्यों को 2 भागों में बांटा

एजेंसी ने राज्यों को रैंकिंग देने के लिए 2 भागों (ग्रुप-ए और ग्रुप-बी) में बंटा है. ग्रुप-ए में 17 बड़े राज्यों को रखा गया है. ग्रुप-ए में महाराष्ट्र पहले और बहार आखिरी पायदान पर है. ग्रुप-बी में पूर्वोत्तर, पहाड़ी और छोटे राज्यों (कुल 11 राज्य) को रखा गया है, जिसमें गोवा पहले और नगालैंड आखिरी नंबर पर है.

बड़े राज्यों में कौन सा राज्य किस स्थान पर

  1. महाराष्ट्र
  2. गुजरात
  3. कर्नाटक
  4. तेलंगाना
  5. तमिलनाडु
  6. हरियाणा
  7. केरल
  8. आंध्रप्रदेश
  9. ओडिशा
  10. पंजाब
  11. छत्तीसगढ़
  12. राजस्थान
  13. पश्चिम बंगाल
  14. उत्तर प्रदेश
  15. मध्यप्रदेश
  16. झारखंड
  17. बिहार

पूर्वोत्तर, पहाड़ी और छोटे राज्यों की रैंकिंग

  1. गोवा
  2. उत्तराखंड
  3. सिक्किम
  4. हिमाचल प्रदेश
  5. असम
  6. त्रिपुरा
  7. मिजोरम
  8. मेघालय
  9. अरुणाचल प्रदेश
  10. मणिपुर
  11. नगालैंड

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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