बोकारो ट्रेजरी घोटाला: कौशल पांडेय की जमानत पर 27 जुलाई को आएगा फैसला

बोकारो ट्रेजरी से 11 करोड़ रुपये के अवैध निकासी मामले में मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. कोर्ट 27 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगा. करोड़ों की संपत्ति जब्त और कई आरोपी जेल भेजे गए हैं.


रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट

Bokaro Treasury Scam: बोकारो ट्रेजरी से करीब 11 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के बहुचर्चित मामले में मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. सीआईडी की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब अदालत इस मामले में 27 जुलाई को अपना निर्णय सुनाएगी. यह मामला सरकारी धन की फर्जी निकासी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी जांच झारखंड सीआईडी कर रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं.

एजी की रिपोर्ट के बाद खुला करोड़ों के घोटाले का राज

बोकारो ट्रेजरी से अवैध निकासी का मामला उस समय सामने आया, जब महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ. रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य के वित्त विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए. जांच में सामने आया कि बोकारो जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की लेखा शाखा से फर्जी तरीके से वेतन और अन्य मदों में करोड़ों रुपये की निकासी की गई थी. इसके बाद संबंधित अधिकारियों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी ने मामले की जांच अपने हाथ में ली.

मुख्य आरोपी समेत कई लोग पहुंच चुके हैं जेल

जांच के दौरान सीआईडी ने मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया. पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर मामले में एएसआई अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार और काजल मंडल को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया. सीआईडी का दावा है कि सभी आरोपियों की भूमिका सरकारी धन की अवैध निकासी और उसके वितरण में रही है. एजेंसी ने जांच के दौरान डिजिटल और वित्तीय दस्तावेजों सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं.

ओटीपी और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर निकाले गए पैसे

सीआईडी द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी कौशल पांडेय ने पूरे फर्जीवाड़े को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया. जांच एजेंसी का आरोप है कि वह डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) को विश्वास में लेकर पहले ओटीपी प्राप्त करता था और फिर धोखे से आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लेता था. इसके बाद पुलिसकर्मियों के रिवार्ड और जीपीएफ से संबंधित अभिलेखों में हेरफेर कर सरकारी राशि अपनी मां बृज कुमारी देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता था. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी गृह रक्षक सतीश कुमार के खाते का भी इस्तेमाल करता था और वहां भेजी गई राशि का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा नकद वापस ले लेता था.

करोड़ों की संपत्ति और नकदी जब्त

मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने आरोपियों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है. एजेंसी ने बोकारो स्थित आरोपियों के आलीशान मकान को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की, जबकि 1.18 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को फ्रीज कर दिया गया. इसके अलावा, सिपाही काजल मंडल के घर पर छापेमारी के दौरान 8.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. सीआईडी का मानना है कि यह राशि भी अवैध निकासी से जुड़ी हो सकती है. बरामद दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की भी जांच की गई है.

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चार्जशीट दाखिल, फैसले पर टिकी निगाहें

सीआईडी इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और जांच एजेंसी का कहना है कि उसके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. अब मुख्य आरोपी कौशल कुमार पांडेय की जमानत याचिका पर 27 जुलाई को आने वाला अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि जमानत मंजूर होती है तो मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग दिशा ले सकती है, जबकि जमानत खारिज होने की स्थिति में आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेगा. बोकारो ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का यह मामला झारखंड के चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल है. ऐसे में अदालत के आगामी फैसले पर जांच एजेंसियों, प्रशासन और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

By Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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