रांची. पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद भी इसका कोई असर नहीं दिख रहा है. शहर की मंडियों से लेकर फलों के ठेले पर धड़ल्ले से प्लास्टिक कैरी बैग का प्रयोग किया जा रहा है. प्रभात खबर के संवाददाता ने जब सब्जी मंडियों में जाकर इसका जायजा लिया, तो हर जगहों पर लोग धड़ल्ले से पॉलिथीन का इस्तेमाल करते दिखे. सब्जी और फल दुकानदारों में प्रतिबंध का कोई डर देखने को नहीं मिला. जानकारों का कहना है कि सिर्फ रांची में पॉलिथीन की खपत हर माह लगभग 45 टन से अधिक है. मंडियों और बाजार में पॉलिथीन की बिक्री करने वाले दिन भर बाजार में घूम-घूम कर सब्जी और फल दुकानदारों को पॉलिथीन पहुंचाते रहते हैं.
सिर्फ कोरम पूरा कर रहा निगम
पॉलिथीन का उपयोग रोकने को लेकर रांची नगर निगम भी तत्पर नहीं है. खास कर सब्जी मंडी में कोई कार्रवाई नहीं किया जा रही है. केवल अनाउंस करके कोरम पूरा किया जा रहा है. सब्जी दुकानदार ग्राहकों को पॉलिथीन नहीं दें, वरना पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी. यह अनाउंस मंगलवार को भी निगम के कर्मी करते दिखे. लेकिन, सब्जी दुकानदारों और फलों की बिक्री करने वालों पर इसका कोई असर नहीं दिखा.
स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है पॉलिथीन
पर्यावरण विशेषज्ञ की मानें, तो प्लास्टिक कचरे के जमीन में दबने की वजह से वर्षा जल का भूमि में संचरण नहीं हो पाता है. नतीजा यह होता है कि भू-जल स्तर गिरने लगता है. प्लास्टिक कचरा प्राकृतिक चक्र में नहीं जा पाता है. इससे पूरा पर्यावरण चक्र अवरुद्ध हो जाता है. पॉलीथिन पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है. स्वास्थ्य के लिए भी यह काफी नुकसानदायक है.
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