Satirical Drama: रविवार की शाम झारखंड फिल्म एंड थिएटर एकेडमी (JFTA) का नया मंच एक बार फिर कला, संवाद और प्रेरणा का केंद्र बना. नए मंच पर पहली बार व्यंग्य नाटक "भ्रष्टाचार का अचार" का मंचन किया गया, जिसने भ्रष्टाचार जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे को प्रभावशाली अंदाज में दर्शकों के सामने रखा. हालांकि कार्यक्रम का सबसे भावुक और यादगार पल तब आया, जब JFTA के पूर्व छात्र और अभिनेता आयुष्मान ने उसी मंच पर लौटकर नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ अपने अनुभव साझा किए, जहां से कभी उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी.
नाटक ने दिया सामाजिक संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत "भ्रष्टाचार का अचार" के मंचन से हुई. व्यंग्य और हास्य के माध्यम से प्रस्तुत इस नाटक ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष किया. कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावी प्रस्तुति ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया कि भ्रष्टाचार केवल व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी विषय है.
आयुष्मान के साथ संवाद बना कार्यक्रम का आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे खास हिस्सा अभिनेता आयुष्मान के साथ आयोजित संवाद सत्र रहा. उन्होंने JFTA के छात्रों से खुलकर बातचीत की और रंगमंच से लेकर टेलीविजन तथा फिल्मों तक के अपने सफर के कई अनुभव साझा किए. उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में शुरुआती संघर्ष, ऑडिशन के दौर, असफलताओं और लगातार सीखते रहने के महत्व पर विस्तार से बात की. छात्रों ने उनसे अभिनय, करियर और मुंबई में काम करने से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने सहजता से जवाब दिया. यह संवाद छात्रों के लिए केवल जानकारी देने वाला नहीं था, बल्कि उन्हें अपने सपनों के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा भी दे गया.
उसी मंच पर लौटे जहां से हुई थी शुरुआत
JFTA के लिए यह पल इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि जिस मंच पर कभी आयुष्मान एक छात्र के रूप में अभिनय सीखते थे, उसी मंच पर आज वे सफल अभिनेता के रूप में नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे थे. यह दृश्य संस्था के लिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अनुभव और सपनों की विरासत सौंपने जैसा भावुक क्षण बन गया.
दूरदर्शन से शुरू हुई पहचान
आयुष्मान ने हाल के प्रोजेक्ट "सरू" से पहले दूरदर्शन के चर्चित धारावाहिक "जन-जन में राम" में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस धारावाहिक का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने किया था, जिसने उनके अभिनय करियर को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
पिता का अधूरा सपना बना बेटे की उड़ान
आयुष्मान की सफलता के पीछे उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनके पिता पंडित विष्णु शर्मा प्रतिष्ठित वास्तु शास्त्री हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं. अभिनय का सपना कभी उनके पिता का था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वह उसे पूरा नहीं कर सके. उन्होंने अपने बेटे को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उसका साथ दिया.
रंगमंच से मुंबई तक का सफर
एमिटी यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में स्नातक आयुष्मान ने अपने अभिनय की शुरुआत रंगमंच से की. कई नाटकों में अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने अपने अभिनय को निखारा. JFTA में मेंटर राजीव सिन्हा के मार्गदर्शन में उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं और आत्मविश्वास हासिल किया. इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और आज अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं.
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झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा
आयुष्मान की उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ छोटे शहरों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है. JFTA का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को सपने देखने, संघर्ष करने और उन्हें साकार करने का भरोसा देने वाला यादगार अवसर बन गया.
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