रांची की वंदना खेमका ने फर्नीचर के इतिहास पर लिखीं किताब, इंटीरियर डिजाइन के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी

Ranchi News: रांची की लेखिका वंदना खेमका ने फर्नीचर के इतिहास और विकास पर आधारित पुस्तक “द क्रॉनिक्ल्स आफ एशेंट टू मॉर्डन फर्नीचर” लिखी है. इसमें प्राचीन काल से आधुनिक युग तक फर्नीचर के डिजाइन, उपयोगिता और कारीगरी की जानकारी दी गई है. यह पुस्तक इंटीरियर डिजाइन और आर्किटेक्चर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची की लेखिका वंदना खेमका ने फर्नीचर के इतिहास और उसके विकास पर आधारित एक रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तक लिखी है. उनकी किताब “द क्रॉनिक्ल्स आफ एशेंट टू मॉर्डन फर्नीचर” इन दिनों चर्चा में है. यह पुस्तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर उपलब्ध है और फर्नीचर के इतिहास को सरल और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करती है.

प्राचीन काल से आधुनिक युग तक का विस्तृत वर्णन

इस पुस्तक में प्राचीन काल से लेकर 21वीं सदी तक फर्नीचर के विकास की विस्तृत जानकारी दी गई है. लेखिका ने इसमें बताया है कि समय के साथ फर्नीचर के स्वरूप, डिजाइन और उपयोगिता में किस तरह बदलाव आया. पाषाण युग से शुरू होकर यह पुस्तक विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों में फर्नीचर की बनावट, शैली और उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देती है. इससे पाठकों को यह समझने में मदद मिलती है कि फर्नीचर केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है.

दुनिया की प्रमुख फर्नीचर शैलियों का उल्लेख

पुस्तक में दुनिया के विभिन्न देशों की फर्नीचर शैलियों को भी कालानुक्रमिक रूप से प्रस्तुत किया गया है. इसमें प्राचीन मिस्र, ग्रीस और रोम की फर्नीचर परंपराओं से लेकर पुनर्जागरण काल, विक्टोरियन शैली, आर्ट नूवो और आर्ट डेको जैसी प्रसिद्ध डिजाइन शैलियों का विस्तार से वर्णन किया गया है. साथ ही आधुनिक समय के फर्नीचर डिजाइन और कारीगरी के बारे में भी जानकारी दी गई है.

इंटीरियर डिजाइन के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी

लेखिका वंदना खेमका के अनुसार यह पुस्तक विशेष रूप से इंटीरियर डिजाइन और आर्किटेक्चर के विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. इसके अलावा डिजाइन और कला में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संदर्भ पुस्तक है. पुस्तक को इस तरह तैयार किया गया है कि इसे एक कॉफी-टेबल बुक के रूप में भी संग्रह में रखा जा सकता है.

फर्नीचर में झलकती है संस्कृति और जीवनशैली

वंदना खेमका का मानना है कि फर्नीचर केवल घर की सजावट या उपयोग की वस्तु नहीं होता, बल्कि यह हमारी संस्कृति, जीवनशैली और समय की झलक भी प्रस्तुत करता है. इसलिए फर्नीचर के इतिहास को समझना अपने आप में एक रोचक अनुभव है. उनकी यह पुस्तक पाठकों को फर्नीचर की दुनिया के विकास और उसके महत्व को समझने में मदद करती है.

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कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं वंदना खेमका

वंदना खेमका केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक योगा एक्सपर्ट, साइक्लिस्ट, मैराथन रनर, इंटीरियर डिजाइनर और बीआईएम एक्सपर्ट भी हैं. विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपनी इस पुस्तक के माध्यम से फर्नीचर के इतिहास को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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