ईरान युद्ध का सबसे बड़ा विजेता रूस और चीन! अमेरिका को ऐसे मात दे रहे पुतिन और जिनपिंग

Iran War Winner Russia China: ईरान युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर शिया मुल्क पर हमला कर दिया. अमेरिका की मिलिट्री पावर देखकर लगा था कि शायद ईरान ज्यादा दिन तक न टिके, लेकिन 15 दिन से ज्यादा दिन बीतने के बाद भी ईरान जवाबी मुकाबला कर रहा है. इसमें ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल को भी नुकसान हो रहा है, लेकिन रूस और चीन अपने-अपने क्षेत्र में फायदा पा रहे हैं.

Iran War Winner Russia China: 28 फरवरी को Iran पर United States और Israel के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष को लेकर कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं. अमेरिका इस सैन्य कार्रवाई को अपनी सफलता बता रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि उसने भी जवाबी हमलों में गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया है. ईरान में अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है, इजरायल में मरने वालों की संख्या 11 से ज्यादा है, जबकि अब तक 6 सैनिकों की मौत हुई है. हालांकि भू-राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि इस पूरे टकराव में असली रणनीतिक फायदा चीन और रूस को मिला है. 

रूस को क्या फायदा हो रहा है?

पिछले साल जब से डोनाल्ड ट्रंप दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बने हैं, तब से अमेरिका लगातार रूस के ऊर्जा कारोबार को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा था. वाशिंगटन का मानना था कि तेल और गैस से मिलने वाली कमाई ही मॉस्को की सैन्य ताकत को सहारा देती है. इसी वजह से अमेरिका ने रूस के दो बड़े खरीदारों भारत और चीन को रूसी तेल से दूर करने की कोशिश की. 

इसके तहत भारत के निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए गए और रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए गए. शुरुआत में यह रणनीति सफल होती दिखाई दी, लेकिन हालात उस समय बदल गए जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. इस संघर्ष के कारण मध्य पूर्व जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने लगी और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई.

इस बदलते माहौल ने व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाले रूस को अप्रत्याशित फायदा पहुंचाया. पिछले सप्ताह अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए लिया गया है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर रूस के तेल पर लगे कुछ यूक्रेन-संबंधी प्रतिबंधों को और ढीला किया जा सकता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित न हो.

2026 की शुरुआत में पुतिन के सामने मुश्किल स्थिति थी. यूक्रेन में जारी युद्ध का खर्च रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा था. देश के बजट में यूराल्स क्रूड की औसत कीमत करीब 59 डॉलर प्रति बैरल मानी गई थी, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों, ऊंची ब्याज दरों और श्रमिकों की कमी के कारण जनवरी में ऊर्जा से मिलने वाला राजस्व 2020 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इससे रूस की कर आय भी उम्मीद से कम रही.

हालांकि स्थिति तब बदल गई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए. जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला जहाजों का मार्ग प्रभावित हुआ और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. इससे रूस को बड़ी आर्थिक राहत मिली.

विशेषज्ञों के मुताबिक अब वैश्विक तेल संकट के बीच रूसी कच्चा तेल पहले की तरह भारी छूट पर नहीं बेचना पड़ रहा. भारत और चीन को अब तक डिस्काउंट वाला तेल मिल रहा था, वह होर्मुज बंद होने के बाद अपनी आपूर्ति सुरक्षित करने में लगे हैं. रूस अब अपना तेल प्रीमियम रेट पर बेच रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात में रूस को तेल कारोबार से हर दिन लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1,389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त आय हो रही है. 

संघर्ष शुरू होने के बाद के पहले 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात के जरिए करीब 1.3 अरब से 1.9 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई कर ली. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो महीने के आखिर तक मॉस्को की अतिरिक्त आय 3.3 अरब डॉलर से 5 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकती है. 

चीन ने तकनीक में मात देकर जीत हासिल की!

लंबे समय तक सैटेलाइट तस्वीरों के मामले में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का लगभग एकाधिकार रहा था, लेकिन अब चीन तेजी से एक वैकल्पिक प्रणाली खड़ी करता नजर आ रहा है.

ईरान युद्ध से जुड़ी कई अहम सैटेलाइट तस्वीरें चीनी कमर्शियल नेटवर्क के जरिए सामने आई हैं. इन तस्वीरों में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल में संसाधनों को हुए नुकसान के संकेत दिखाई दिए. वहीं, एक प्रमुख अमेरिकी कमर्शियल सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी ने कुछ संवेदनशील तस्वीरों को जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी थी. 

इससे चीन के तेजी से विस्तार कर रहे कमर्शियल अर्थ-ऑब्जर्वेशन सेक्टर की ओर वैश्विक ध्यान गया. यह क्षेत्र पश्चिमी कंपनियों की तुलना में अपेक्षाकृत कम राजनीतिक और नियामकीय प्रतिबंधों के साथ काम करता है.

युद्ध से जुड़ी अधिकतर तस्वीरें चीन के बढ़ते सैटेलाइट नेटवर्क से सामने आई हैं, जिसमें Chang Guang Satellite Technology द्वारा संचालित Jilin-1 satellite constellation प्रमुख है. इस समूह में 100 से अधिक सैटेलाइट शामिल हैं, जो सब-मीटर स्तर की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम हैं और किसी भी रणनीतिक क्षेत्र की बार-बार निगरानी कर सकते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भविष्य के युद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है. कई दशकों तक Maxar Technologies और Planet Labs जैसी अमेरिकी कंपनियां वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट तस्वीरों की मुख्य आपूर्तिकर्ता रही हैं. लेकिन चीन के तेजी से बढ़ते नेटवर्क ने इस प्रभुत्व को चुनौती देना शुरू कर दिया है.

ये भी पढ़ें:- US-इजरायल अटैक से पहले अली खामेनेई बंकर में क्यों नहीं गए? पूर्व सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने खोला राज

ये भी पढ़ें:- ईरान के ‘शाहेद’ की कॉपी कर अमेरिका ने बनाया ‘लुकास’, सुपरपॉवर US ने ‘चीन वाला धंधा’ क्यों अपनाया?

विश्लेषकों के अनुसार भारत पाकिस्तान के संघर्ष में भी चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी. हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान अपना कोई बचाव नहीं कर पाया. भारत से गुहार लगाने के बाद ही ऑपरेशन सिंदूर को बंद किया गया था. खैर, ये तो पुराना युद्ध है, लेकिन नए युद्ध में अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान को बर्बाद करने पर तुले हैं वहीं रूस और चीन अपने को मजबूत करने में लगे हैं. इस युद्ध के अब तक के सबसे बड़े लाभार्थी यही दो देश हैं. हां! चीन अपने तेल और गैस के लिए ईरान पर निर्भर था, वहां उसे जरूर नुकसान हुआ है. लेकिन भविष्य की तकनीक सैटेलाइट में चीन बाजी मार रहा है. 

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >