Old Portuguese Shipwreck: ‘द मैरिनर्स मिरर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज 7 मार्च 1533 को लिस्बन से भारत के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में भीषण तूफान और समुद्री लहरों की चपेट में आकर नामीबिया के तट पर एक चट्टान से टकराकर डूब गया. वैज्ञानिकों को यह जहाज एक ‘टाइम कैप्सूल’ की तरह मिला है, जिसमें 16वीं सदी की व्यापारिक दुनिया के राज दफन हैं.
तांबे के बोझ ने बचा लिया 500 साल पुराना इतिहास
हैरानी की बात यह है कि समंदर के खारे पानी और रेत में रहने के बावजूद जहाज का सामान खराब नहीं हुआ. खोज के दौरान वहां 40 टन से ज्यादा माल मिला है. इसमें जहाज पर मौजूद करीब 17 टन तांबे के ब्लॉक (Ingots) ने एक रक्षक का काम किया.
तांबे के जहरीले गुणों की वजह से समुद्री जीवों ने जहाज की लकड़ी और दूसरी चीजों को नुकसान नहीं पहुंचाया, जिससे जहाज का ढांचा और अंदर रखा सामान एकदम सुरक्षित रहा. खुदाई में हजारों सोने और चांदी के सिक्के, कांसे की तोपें और नेविगेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले एस्ट्रोलैब मिले हैं.
16वीं सदी के ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क का खुलासा
जहाज से मिले सामान ने पुराने दौर के ग्लोबल ट्रेड की नई तस्वीरें पेश की हैं. जहाज पर मिले तांबे के ब्लॉक्स पर जर्मनी के ऑग्सबर्ग के मशहूर फुगर (Fugger) परिवार का ‘त्रिशूल’ वाला निशान बना है. इससे साबित होता है कि उस जमाने में यूरोप और अफ्रीका के बीच बड़े स्तर पर कारोबार होता था. इसके अलावा, जहाज से हाथी के सैकड़ों दांत भी मिले हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन दांतों की जांच से पश्चिम अफ्रीकी हाथियों की पुरानी आबादी और उस वक्त के पर्यावरण पर व्यापार के असर को समझने में मदद मिलेगी.
क्रू मेंबर्स का क्या हुआ, अब भी बना है रहस्य
इतिहासकारों का मानना है कि ‘बॉम जीसस’ जहाज अटलांटिक महासागर के खतरनाक रास्तों और खराब मौसम का शिकार हुआ था. हालांकि जहाज का कीमती सामान और ढांचा मिल गया है, लेकिन वहां से इंसानी अवशेष यानी हड्डियां गायब हैं. जानकारों का कहना है कि शायद जहाज डूबने के बाद क्रू मेंबर्स किसी तरह अपनी जान बचाकर तट तक पहुंचने में कामयाब रहे होंगे. नामीबिया के स्केलेटन कोस्ट (Skeleton Coast) की रेत में दबा यह जहाज आज की पीढ़ी के लिए शुरुआती खोजकर्ताओं की चुनौतियों और समुद्री रास्तों की मुश्किलों को समझने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है.
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