होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान का बड़ा दांव: अमेरिका के सामने रखी 3 फेज की शर्त, क्या ट्रंप मानेंगे बात?

Strait Of Hormuz: मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने नया दांव चला है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, तेहरान ने होर्मुज से सेना हटाने के लिए तीन चरणों वाला शांति प्रस्ताव दिया है. ट्रंप प्रशासन इस ऑफर की बारीकी से जांच कर रहा है, जबकि रूस ने भी इस मामले में खुलकर ईरान का समर्थन किया है.

Strait Of Hormuz: ईरान ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए एक बड़ा राजनयिक कदम उठाया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को एक नया प्रस्ताव भेजा है. इसमें ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में अपने सैन्य अभियानों को रोकने की बात कही है. हालांकि, इसके बदले ईरान की शर्त है कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म करे, जिसने ईरान के समुद्री व्यापारिक केंद्रों को ठप कर रखा है.

3 फेज में होगा काम 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह फ्रेमवर्क पेश किया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के सूत्रों का कहना है कि इस समझौते के तहत फिलहाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पर चर्चा को किनारे रख दिया गया है. ईरान का मुख्य मकसद मौजूदा गतिरोध को खत्म करना है. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

ट्रंप की टीम कर रही विचार

सोमवार को विदेश मंत्री अराघची ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, पुतिन ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के डटे रहने की तारीफ की और रूस की तरफ से कूटनीतिक मदद का भरोसा दिया. दूसरी तरफ, वाशिंगटन में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ इस ईरानी प्रस्ताव की समीक्षा की है.

अमेरिका को अब भी है शक 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को स्पष्ट किया कि हालांकि तेहरान डील करने के लिए गंभीर दिख रहा है, लेकिन अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान का पूरा कब्जा बर्दाश्त नहीं करेगा. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि यह तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी थी. ईरान के नए 3-फेज रोडमैप में पहली शर्त यह है कि अमेरिका और इजरायल युद्ध को तुरंत खत्म करें और दोबारा हमला न करने की लिखित गारंटी दें.

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क्या है सबसे बड़ी अड़चन?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेच ईरान की संप्रभुता (Sovereignty) को लेकर है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने मध्यस्थों से कहा है कि वे होर्मुज पर अपना पूरा अधिकार बनाए रखना चाहते हैं.

इसके बाद ही वे परमाणु कार्यक्रम और प्रॉक्सी ग्रुप्स को फंडिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत शुरू करेंगे. इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के एक्सपर्ट राज जिम्मट का मानना है कि यह शर्त पूरी होना मुश्किल है, क्योंकि जो मुद्दे युद्ध के दौरान हल नहीं हुए, वे बाद में सुलझने की उम्मीद कम है. एक्सियोस ने भी इस प्रस्ताव की शुरुआती जानकारी साझा की है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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