रांची : भू-राजस्व अभिलेख समय के साथ अपडेट नहीं होने पर बैंकों को सरकारी योजनाओं को लागू करने और ऋण उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है.
जमीन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन होने के बाद वास्तविक मालिक की पहचान स्थापित करने में बैंकों को ऋण लेने और देने में पसीने छूट रहे हैं. इससे भूमि की खरीद-फरोख्त और सरकार को पंजीयन से होने वाली आय का भी नुकसान हो रहा है.भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक अधिकांश केस में करेंट टाइटल होल्डर का नाम अभी भी वेबसाइट पर स्पष्ट नहीं है. जबकि वर्ष 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के तौर पर इसके अतिरिक्त किसी अन्य कागजात की जरूरत नहीं है. आरबीआई का कहना है कि सरकार बैंकिंग सिस्टम में ऐसी व्यवस्था करे, जहां भौतिक सत्यापन और रिवेन्यू ऑफिस जाने की बाध्यता न पड़े. आरबीआइ के नियमों के तहत इसका उपयोग टेनैन्सी एक्ट से जुड़ी जमीन किसानों के कृषि ऋण आवेदन के लिए अनिवार्य किया गया है.
264 अंचलों में भू-अभिलेख डिजिटल : डिजिटल इंडिया लैंड रिकाॅर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम के तहत भू-अभिलेख ऑनलाइन हो जाने से भूमि का दस्तावेज ऑनलाइन देखा जा रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा लैंड का रिकॉर्ड संबंधित वेबसाइट के कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखने की सुविधा दी गयी है. एनआइसी के झारभूमि वेबसाइट पर 264 अंचलों में भू-अभिलेखों के रिकॉर्ड की डिजिटल डिटेल मौजूद है. यहां भूमि का ऑनलाइन म्युटेशन, ऑनलाइन लगान सहित इसकी विस्तृत जानकारी जुटायी जा सकती है.
अधिकारियों को खुद खंगालना पड़ रहा रिकाॅर्ड
डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट नहीं रहने से इसके फिजिकल वेरिफिकेशन में बैंकों का काफी समय बर्बाद हो रहा है. समय के साथ रिकॉर्ड के डिजिटल अपडेशन होने से इसे वेरिफाई करने में काफी अधिकारियों को इसका सत्यापन करने के लिए जगह-जगह स्वयं जाना पड़ रहा है. आरबीआइ के नियम 13-2 और 13-4 के तहत लोन एनपीए हो जाने की सूरत में वास्तविक नाम नहीं रहने के चलते इसके मॉर्गेज करने में भी परेशानी हो रही है. साथ ही कोई भी नोटिफिकेशन भेजने के लिए गलतियां होने की गुंजाइश काफी बढ़ जाती है.
