रांची : जनजाति सुरक्षा मंच ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देकर अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों के हनन की शिकायत की है़ ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2004 मेें केरल सरकार व अन्य बनाम चंद्रमोहन व अन्य वाद के आलोक कहा है कि धर्मांतरित जनजाति समुदाय के सदस्य, जिन्होंने जनजातीय परंपरा, रीति- रिवाज, पूजा- अनुष्ठान त्याग दिया है और विवाह, विरासत, उतराधिकार के प्रथागत सामाजिक नियम (कस्टमरी लॉ) का अनुपालन नहीं करते, उन्हें जनजाति का संवैधानिक लाभ नहीं दिया जाना चाहिए़ यह सिर्फ 1932 के खतियान के आधार पर न दिया जाये़
रांची : धर्मांतरित जनजातीय के अधिकारों पर अंकुश लगे
रांची : जनजाति सुरक्षा मंच ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देकर अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों के हनन की शिकायत की है़ ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2004 मेें केरल सरकार व अन्य बनाम चंद्रमोहन व अन्य वाद के आलोक कहा है कि धर्मांतरित जनजाति समुदाय के सदस्य, जिन्होंने जनजातीय […]

अनुसूचित जनजाति समाज के पाहन, पुजार, बैगा, मांझी, नाइकी, जो धार्मिक- सामाजिक पूजा अनुष्ठान कार्य कराते थे, उन्हें जीवनयापन के लिए पारंपरिक सामाजिक जमीन दी गयी थी़ धर्मांतरित होने के बाद भी कुछ लोगों का उस भूमि पर आज भी कब्जा है़ ऐसे मामलों में गुवाहाटी हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आलोक में ऐसी जमीन कब्जा मुक्त करायी जाये और इसे वर्तमान सामाजिक- धार्मिक जनजातीय पुरोहितों को दी जाये़
इसके अतिरिक्त, गैर जनजातीय पुरुषों से विवाह करनेवाली कई जनजातीय महिलाएं / युवतियां पंचायतीराज व्यवस्था सहित अन्य पदों के चुनावों में जनजातीय आरक्षण का लाभ ले रही है़ं ऐसी महिलाओं के नाम पर गैर जनजाति पुरुष भी बड़े पैमाने पर भू-संपत्ति का क्रय कर हड़प रहे है़ं इसे तत्काल रोका जाये़ विवाह बाद जनजातीय महिला का जाति प्रमाण पत्र पति के नाम सहित बनाना अनिवार्य हो़ झारखंड में सीएनटी व एसपीटी एक्ट लागू है़
इसके बावजूद अनुसूचित जनजाति की जमीन गैर जनजाति के दबंग व दलालों के पास जा रही है़ आज सरकार के बाद सबसे अधिक जमीन ईसाई मिशनरियों के पास है़ यह जमीन उनके पास कैसे गयी, इसकी जांच करा कर इसे मूल रैयतों को वापस करायी जाये़ प्रतिनिधिमंडल में डॉ सुखी उरांव, मेघा उरांव, मोहन सिंह मुंडा, वीणा मुंडा, सोमा उरांव, संग्राम बेसरा, पहलवान मुंडा, संदीप उरांव व अन्य शामिल थे़