सुनील झा
पार्ट टू में गायब हो गयी थी उत्तरपुस्तिका
रांची : रांची विश्वविद्यालय के सिमडेगा कॉलेज की छात्रा लीना टोपनो स्नातक पार्ट टू की परीक्षा पास करने के बाद भी अपने सत्र के विद्यार्थियों से एक साल जूनियर हो गयी है. ऐसा इसलिए हुआ कि पहले तो स्नातक पार्ट टू की परीक्षा देने के बाद जांच के दौरान कॉपी गायब हो गयी थी और जब मिली, तब तक पार्ट थ्री की परीक्षा हो चुकी थी.
दूसरी ओर पार्ट टू में 62 फीसदी अंक तो मिले, लेकिन इसके साथ ही दो-दो मार्क्स शीट भी मिल गये. ऐसे में दो-दो अंक पत्र लेकर लीना एक साल से पार्ट थ्री की परीक्षा के लिए विवि का चक्कर लगाती रही. लेकिन विवि ने विशेष परीक्षा नहीं ली. लिहाजा वह 2018 की जगह 2019 की पार्ट थ्री की परीक्षा में शामिल हो रही है, जो 12 अप्रैल से शुरू हो चुकी है. वहीं, दो-दो मार्क्स शीट होने के कारण दोनों में से कौन का मार्क्स शीट मान्य होगा, विवि द्वारा यह भी नहीं बताया जा रहा है. इतना ही नहीं लीना ने पार्ट थ्री की परीक्षा को लेकर यूजीसी से गुहार तक लगायी. यूजीसी ने इस संबंध में विवि के कुलसचिव को पत्र लिख कर आवश्यक कार्रवाई को कहा, पर कार्रवाई नहीं की गयी. अंतत: लीना पार्ट टू की परीक्षा पास करने के बाद भी अपने सत्र के वैसे परीक्षार्थियों के साथ परीक्षा दे रही है, जो पूर्व में फेल हो गये थे.
क्या है मामला: लीना सिमडेगा कॉलेज से राजनीति शास्त्र से ऑनर्स कर रही है. वह वर्ष 2017 में पार्ट टू की परीक्षा में शामिल हुई थी. रिजल्ट जारी होने पर वह फेल थी. अंक पत्र में उसके पेपर तीन का अंक नहीं जोड़ा गया था. जबकि वह पेपर तीन की परीक्षा में शामिल हुई थी. उसने पहले उत्तरपुस्तिका की स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया. परीक्षा विभाग ने स्क्रूटनी नहीं की. इसके बाद उसने आरटीआइ के तहत कॉपी मांगी, ताे पता चला कि उसकी कॉपी नहीं मिल रही है. वह साल भर विवि का चक्कर लगाती रही. पहली परीक्षा में शामिल होने के बाद भी विवि की गलती के कारण उसे पार्ट टू की परीक्षा में फिर से शामिल होना पड़ा. परीक्षा में शामिल होने के बाद उसे पूर्व की परीक्षा का भी रिजल्ट उपलब्ध करा दिया गया. उसके पास अब स्नातक पार्ट टू के दो-दो अंक पत्र हैं.
विश्वविद्यालय ने नहीं की कोई
कार्रवाई : परीक्षा में शामिल होने के बाद भी रिजल्ट में अंक नहीं जोड़ा गया. सूचना के अधिकार के तहत कॉपी मांगने पर कहा गया कि कॉपी नहीं मिल रही है. इस बीच विवि ने उसे पार्ट टू की परीक्षा में फिर शामिल करा दिया. बाद में पूर्व के स्नातक पार्ट टू का अंक भी उसे दे दिया गया. विश्वविद्यालय ने पूरे मामले में न तो किसी को शो कॉज जारी किया न ही किसी पर कोई कार्रवाई. विश्वविद्यालय उस व्यक्ति को चिह्नित तक नहीं किया जिसके कारण परीक्षा में शामिल होने के बाद भी उसे अंक नहीं दिया गया.
