संजय, रांची : स्वास्थ्य सुविधा, इसके लिए जरूरी संरचना व मानव संसाधन की स्थिति राज्य गठन के बाद से अब तक बहुत नहीं बदली है. खासकर डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का खामियाजा बीमार लोगों को भुगतना पड़ रहा है. हालांकि, व्यवस्था में सुधार के लिए कई काम किये गये हैं. खास कर एनएचएम के जरिये. राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा शुरू होने से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है.
राष्ट्रीय व राज्य उच्च पथों सहित अन्य लोकेशन पर बेसिक लाइफ सपोर्ट तथा एडवांस लाइफ सपोर्ट नाम से कुल 329 एंबुलेंस (डायल 108) चलने हैं. इनमें से करीब आधे से अधिक सड़कों पर उतर गये हैं. दूरदराज के गरीबों को आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की यह व्यवस्था कारगर है.
वहीं, आयुष्मान भारत योजना के तहत योग्य लाभुकों को पांच लाख तक की चिकित्सीय सुविधा नि:शुल्क मिलनी है. केंद्र व राज्य सरकार के प्रयास से शिशु मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर तथा टोटल फर्टिलिटी रेट (कुल प्रजनन दर यानी कुल बच्चे प्रति महिला) में भी कमी आयी है तथा जन्म के बाद बच्चों का पूर्ण टीकाकरण काफी बढ़ा है.
क्या है विभाग की चुनौतियां
झारखंड में 32 में से तीन खाद्य निरीक्षक : राज्य में खाद्य निरीक्षकों (फूड इंस्पेक्टर) के कुल 32 सृजित पदों के विरुद्ध सिर्फ तीन कार्यरत हैं. निरीक्षकों की कमी के कारण होटल-रेस्तरां या ठेलों-फुटपाथों पर बिकनेवाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच नहीं होती. अभी जेपीएससी के जरिये 24 खाद्य निरीक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है.
सात ट्रॉमा सेंटर में से किसी का संचालन नहीं हो सका शुरू : सड़क दुर्घटना मौजूदा समय की सबसे बड़ी त्रासदी है. झारखंड गठन के बाद से 15 वर्षों में राज्य भर में करीब 65 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हो चुकी है. इसके बावजूद दुर्घटना के बाद के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधा भी हर कहीं उपलब्ध नहीं है.
राज्य के 80 फीसदी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली और 60 फीसदी में पानी नहीं : राज्य भर में कुल 3957 स्वास्थ्य उप केंद्र (एचएससी) हैं. स्वास्थ्य विभाग के आरसीएच कैंपस, नामकुम के आंकड़े के अनुसार इनमें से करीब 3100 (80 फीसदी) में बिजली की व्यवस्था नहीं है. वहीं, करीब 2300 (60 फीसदी) उप केंद्रों में पानी की अपनी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है.
आयुष से जुड़े कुल 1762 पदों में से 1430 रिक्त : आयुष निदेशालय से लेकर आयुष से संबंधित मेडिकल कॉलेजों तथा विभिन्न संयुक्त अस्पताल व डिस्पेंसरी में चिकित्सकों, शिक्षकों व पदाधिकारियों सहित तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मियों की भारी कमी है. दरअसल, आयुष से जुड़े कुल 1762 पदों में से 1430 (करीब 82 फीसदी) अभी भी रिक्त हैं.
