समाज में एकता बनाये रखें आदिवासी
पारंपरिक तीन दिवसीय विशु शिकार शुक्रवार को संपन्न हो गया.
प्रतिनिधि, बेड़ो.
पारंपरिक तीन दिवसीय विशु शिकार शुक्रवार को संपन्न हो गया. गुरुवार को 12 पाड़हा और 21 पाड़हा के नेतृव में 52 गांव के शिकारियों का दल हरवे हथियार के साथ जंगल में जानवरों का शिकार करते हुए देर शाम इटकी के डोला टांड़ पहुंचा. जहां रात्रि में पड़हा की बैठक में भाग लेते हुए अपने गांव के झंडा के साथ हाजिरी लगी. तत्पश्चात बैठक में गांव की समस्याओं को रखा गया. जहां गांव में सरना व मसना स्थलों का घेराव करने की बात कही गयी. वहीं अंतरजातीय विवाह पर रोक लगाने पर सहमति बनी. आदिवासी समाज को अपनी एकता बनाये पर जोर दिया गया. रात में अलग-अलग चूल्हा बना कर खाना बनाया और शिकार किये गये जंगली जानवरों को बनाकर खाया गया. रात्रि विश्राम के बाद सुबह सभी शिकारी अपने-अपने गांव चले गये. मौके पर 12 पड़हा के राजा विशाल उरांव, 21 पाड़हा के राजा महादेव कुजूर, दीवान बिरवा खेस, डहरु उरांव, पाड़हा प्रवक्ता चरवा उरांव, पाड़हा सदस्य बंधना उरांव, बंदे उरांव, पीटर तिर्की, सुका महतो, मंगू पुजार, सोमरा पाहन, कोटवार मंगरु मुंडा, सभी पाड़हा के महतो, पाहन, पुजार, कोटवार व पाड़हा प्रेमी उपस्थित थे.
बेड़ो, विशु शिकार में शामिल अपने प्रतीक चिह्न झंडा के के साथ पाड़हा के लोग.B