केरल का अनाथालय संदेह के घेरे में, कल जसीडीह स्टेशन पर पहुंचेंगे बच्चे

रांचीः झारखंड से बड़े पैमाने पर बच्चों की तस्करी हो रही है. केरल में झारखंड के बच्चों की बरामदगी के बाद इस बात का खुलासा हुआ है. खबरों के मुताबिक झारखंड, प बंगाल व बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों से सैकड़ों बच्चे केरल ले जाये जा रहे हैं. इन राज्यों के छह सौ से अधिक […]

रांचीः झारखंड से बड़े पैमाने पर बच्चों की तस्करी हो रही है. केरल में झारखंड के बच्चों की बरामदगी के बाद इस बात का खुलासा हुआ है. खबरों के मुताबिक झारखंड, प बंगाल व बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों से सैकड़ों बच्चे केरल ले जाये जा रहे हैं. इन राज्यों के छह सौ से अधिक बच्चों को पल्ककाड रेलवे स्टेशन पर एजेंटों के साथ पकड़ा गया था.

पटना-कोच्ची एक्सप्रेस से 500 बच्चे 24 मई को वहां पहुंचे थे. इन बच्चों में से 167 बच्चे झारखंड के थे. इन सभी को कोङिाकोड के मुक्कम मुसलिम अनाथालय ले जाया जाना था. इस अनाथालय का अध्यक्ष इंडियन यूनियन मुसलिम लीग के एक नेता सैयद हैदर अली सिहाब थांगल है. इस संबंध में जीआरपी ने मामला दर्ज किया है. इधर, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की बरामदगी के बाद केरल में हड़कंप मच गया है. एक एनजीओ के आग्रह पर केरल हाइकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लुर व न्यायाधीश पीआर रामचंद्रन मेनन की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता से जांच की जरूरत बतायी है. इस मामले में झारखंड सहित बिहार व प बंगाल की सरकार को नोटिस दिया गया है. केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय व रेलवे को भी इसमें पार्टी बनाया गया है.

मामला बाल व्यापार का: केरल राज्य मानवाधिकार आयोग के नोडल पदाधिकारी एस श्रीजीत ने मामले की जांच के बाद सबसे पहले औपचारिक रूप से यह कहा है कि यह मामला बाल व्यापार का है. वहीं आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश जेबी कोसी ने कहा कि है वह जांच पूरी होने तक इंतजार करेंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि जांच में मानव अंग व्यापार व बाल यौन प्रताड़ना के बिंदु को भी शामिल किया जाना चाहिए.

आज भेजे जायेंगे बच्चे: सोमवार को 140 बच्चे झारखंड के लिए चलेंगे. वे बुधवार तक जसीडीह स्टेशन पहुंचेंगे. यह जानकारी श्रमायुक्त मनीष रंजन ने दी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अभी अनाथालय पर केस दर्ज नहीं कराया है.

क्राइम ब्रांच की उच्चस्तरीय टीम को इस मामले में जांच का जिम्मा मिला है. जंच के क्रम में ट्रेन में बच्चों के साथ रहे तथा बाद में की गयी निशानदेही के आधार पर अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से छह झारखंड के गोड्डा जिले के व शेष चार प बंगाल के मालदा जिले के हैं. सबसे अंत में जिस 30 वर्षीय शफीक शेख की गिरफ्तारी हुई है, वह गोड्डा जिले के परसिया गांव का रहनेवाला है. शफीक मुक्कम मुसलिम अनाथालय में ही गत तीन वर्षो से रसोइया का काम कर रहा है. इसकी पत्नी रुबीक हातूम भी वहीं सफाई कर्मी है. शफीक पर इससे पहले भी 23 बच्चों को अनाथालय पहुंचाने का आरोप है. इधर, झारखंड के बच्चों को वहां से लाने के लिए झारखंड के श्रमायुक्त मनीष रंजन के नेतृत्व में आठ सदस्यीय दल केरल गया है. कुल 167 में से 129 बच्चे वहां से ट्रेन से झारखंड आ रहे हैं. 31 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ हैं, जो सूचना मिलने पर केरल पहुंचे थे. वहीं सात बच्चों की पहचान पक्की नहीं होने के कारण उन्हें केरल सरकार के अधिकारियों ने अपने पास रखा है.

राजनीतिक दबाव

दरअसल केरल के अनाथालय अपने यहां काम कर रहे लोगों की गतिविधियों की जांच की बात का विरोध करते रहे हैं. इंडियन यूनियन मुसलिम लीग केरल के कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार का सहयोगी दल है. इस वजह से केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी व गृह मंत्री रमेश चेन्नीयाला ने इस मामले में लगभग चुप्पी साध रखी है.

अनाथालय प्रबंधन परेशान

झारखंड व बिहार के बच्चों के केरल पहुंचने के एक दिन बाद 25 मई को प बंगाल के भी 123 बच्चे वहां ले जाये गये थे. इन्हें मल्लपपुरम जिले के अनवरुल हुदा अनाथालय ले जाना था. केरल से मिली खबरों के मुताबिक संबंधित अनाथालय पूरी कोशिश में लगे हैं कि मामले को बाल व्यापार से न जोड़ा जाये. वह इसे सिर्फ प्रक्रिया की चूक व कुछ गलतफहमी मान रहे हैं. उनका कहना है कि गरीब इलाके के बच्चों को भोजन व शिक्षा के लिए अनाथालय लाना कोई अपराध नहीं है. उनका यह भी तर्क है कि संबंधित राज्य सरकारों या किसी बच्चे के अभिभावक से कोई शिकायत नहीं मिली है. लिहाजा यह मामला बाल व्यापार का नहीं है, पर अनाथालय प्रबंधन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जिन बच्चों के अभिभावक जिंदा है, उन्होंने उनका नाम भी अनाथ बच्चों की सूची में क्यों लिखा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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