गोला: गोला वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. हाथियों का झुंड चार अलग-अलग दलों में बंटकर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पात मचा रहा है. बीती रात हाथियों ने मक्का, धान का बिचड़ा, लौकी, मूंगफली, ओल, नेनुआ, बोदी सहित अन्य खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर रौंदकर और खाकर नष्ट कर दिया.
इससे किसानों की चिंता और बढ़ गयी है. वन विभाग के अनुसार 29 हाथियों का झुंड हेसापोड़ा जंगल में, 18 हाथियों का दल सुतरी जंगल में, नौ हाथी कुम्हरदगा जंगल में तथा तीन हाथी साड़म पंचायत के बड़की हेसल जंगल में डेरा डाले हुए हैं.
रात होते ही ये हाथी जंगलों से निकलकर आसपास के गांवों में पहुंच रहे हैं और खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. बीती रात हाथियों ने हेसापोड़ा, परसाडीह, कोरांबे, रकुवा, लिपिया, बुटगोड़वा, गंधौनिया, सुतरी, रोला, चक्रवाली, कुम्हरदगा एवं बड़की हेसल समेत दर्जनों गांवों में जमकर उत्पात मचाया.
इस दौरान रामदेव महतो, विनय महतो, सुदेश महतो, नागेश्वर महतो, मिथिलेश बेदिया, संगीता देवी सहित कई किसानों के खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो गयी. किसानों का कहना है कि लगातार हाथियों के हमलों से उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है.
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने, प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने तथा हाथी प्रभावित गांवों में नियमित गश्ती बढ़ाने की मांग की है.
वहीं वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, रात के समय अकेले खेतों की ओर नहीं जाने तथा हाथियों के झुंड के पास जाने या उन्हें उकसाने से बचने की अपील की है. विभाग ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्थिति पर नजर बनाये हुए है.
