करम जावा उठी पर अखाड़े में गूंजे पारंपरिक गीत, ढोल-नगाड़े पर थिरके ग्रामीण

दुलमी प्रखंड में करम जावा उठी का पर्व पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ धूमधाम से मनाया गया. ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े की धुन पर नाच-गान कर उत्साह दिखाया. यह पर्व प्रकृति से जुड़ी आस्था का प्रतीक है.

दुलमी. दुलमी प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को करम जावा उठी को लेकर विभिन्न अखाड़ों में पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किये गये. इस दौरान ग्रामीणों में पर्व को लेकर उत्साह देखा गया. करम जावा उठी से भादो माह की एकादशी तक महिलाएं नियमों का पालन करते हुए व्रत करेंगी.

झारखंडी आदिवासियों का प्रमुख पर्व है करम

करम पर्व झारखंडी आदिवासियों का प्रमुख पर्व है. इसे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया जाता है. पर्व के दौरान महिलाएं ससुराल से मायके आकर करम जावा की सेवा करती हैं. एकादशी के दिन उपवास रखकर करम जावा डाली और करम डाली की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

पाहन सुनाते हैं कर्मा-धर्मा की कहानी

पूजा के दौरान गांव के पाहन कर्मा-धर्मा की कहानी सुनाते हैं. कहानी सुनने के लिए महिला, पुरुष और बच्चे करम अखाड़ा में जुटते हैं. करम व्रती महिलाएं अपने भाइयों की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं.

प्रकृति से जुड़ी आस्था का प्रतीक

ग्रामीणों के अनुसार, करम पूजा प्रकृति से जुड़ी आस्था का प्रतीक है. पर्व के दौरान सभी लोग मिलकर ढोल-नगाड़े की धुन पर नाच-गान करते हैं. इससे गांवों में पारंपरिक संस्कृति और सामूहिकता का माहौल बनता है.

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By Prabhat khabar news desk

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