रामगढ़ : रामगढ़ कॉलेज में बहुविषयक शोध विमर्श की साप्ताहिक शृंखला की आठवीं कड़ी के तहत गुरुवार को ‘प्रेमचंद की लेखन-शैली’ विषय पर शोध प्रस्तुति दी गयी. उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ शाहनवाज खान ने पीपीटी के माध्यम से स्मार्ट बोर्ड पर प्रस्तुति दी.
कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ बिमल कुमार मिश्रा ने की. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की प्रासंगिक रचनाएं जनसाधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और समस्याओं का बखूबी चित्रण करती हैं. उनके संदेश वर्तमान समय में पहले से अधिक प्रासंगिक हैं. उन्होंने कहा कि मशीनीकरण के दौर में लोग दूसरों को तो छोड़िए, अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों से भी प्रेम नहीं करते. ऐसे समय में प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ से सीख लेने की जरूरत है.
प्रेमचंद की लेखन शैली पर चर्चा
डॉ शाहनवाज खान ने कहा कि प्रेमचंद उर्दू और हिंदी दोनों साहित्य के महत्वपूर्ण साहित्यकार थे. उनकी लेखन शैली ने उनके संदेशों को प्रभावकारी बनाया. उर्दू विभाग की छात्रा उम्मे सलमा ने ‘प्रेमचंद की कथाओं के मजमून और पैगाम’ विषय पर प्रस्तुति दी. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने सामाजिक बुराइयों पर विस्तार से लिखा है.
उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए डॉ शाहनवाज खान और उम्मे सलमा की सराहना की गयी तथा प्राचार्य ने उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किया. संचालन शोध समन्वयक सह संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति कमल ने किया. कार्यक्रम में डॉ कामना राय, रोज उरांव, डॉ रामाज्ञा सिंह, डॉ मालिनी डीन, डॉ बलवंती मिंज, डॉ राहुल कुमार, डॉ संगीता बारला, डॉ शालिनी प्रकाश, डॉ नीतू मिंज, साजिद हुसैन, बीरबल महतो समेत शोध, स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित थे.
