करोड़ों की लागत... फिर भी ताला! झारखंड के पतरातू लेक रिसॉर्ट में मंत्री जी के उद्घाटन के बाद भी क्यों मायूस हैं पर्यटक?

झारखंड का पतरातू लेक रिसॉर्ट, जो कभी अपनी विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिए जाना जाता था, अब सरकारी उपेक्षा का शिकार है. करोड़ों की लागत से बनी फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोट क्लब जैसी सुविधाएं बंद पड़ी हैं, जिससे पर्यटकों को भारी निराशा हो रही है.

रामगढ़ से अजय कुमार की रिपोर्ट

Patratu Lake Resort, रामगढ़ : झारखंड के सबसे खूबसूरत और प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार रामगढ़ जिले का पतरातू लेक रिसॉर्ट इन दिनों सरकारी तंत्र की घोर उपेक्षा का शिकार है. करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से विकसित की गई विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद दम तोड़ती नजर आ रही हैं. हाल ही में पर्यटन मंत्री सुदीव्य कुमार ने यहां बड़े तामझाम के साथ फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और म्यूजिकल फाउंटेन का उद्घाटन किया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का नियमित संचालन आज तक शुरू ही नहीं हो सका है. नतीजतन, सोशल मीडिया पर रील्स और तस्वीरें देखकर दूर-दराज से पहुंच रहे पर्यटकों को भारी निराशा हाथ लग रही है.


बंद पड़ा है बोट क्लब, जंग खा रही हैं नावें

पतरातू डैम की बदहाली सिर्फ फ्लोटिंग रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है. पर्यटन विभाग द्वारा संचालित बोट क्लब पिछले कई महीनों से पूरी तरह बंद है और उसके मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ है. विभाग की ओर से पर्यटकों के लिए खरीदी गईं कीमती मोटर बोट्स डैम के किनारे लावारिस खड़ी हैं, जबकि कई पेडल बोट्स पानी से बाहर सड़ रही हैं. वर्तमान में विभाग की नाकामी के बीच केवल 'विस्थापित नाविक संघ' द्वारा सीमित स्तर पर अपने स्तर से नौकायन और मोटर बोट की सुविधा दी जा रही है. सरकारी व्यवस्था ठप होने से यहां के स्थानीय पर्यटन व्यवसाय और नाविकों की आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है.


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पार्क बना जंगल: झूले टूटे, बिजली के पोल और शेड भी चोरी

रिसॉर्ट के पार्क एरिया की स्थिति तो और भी ज्यादा चिंताजनक और डरावनी हो चुकी है. बच्चों के मनोरंजन के लिए लाखों की लागत से लगाए गए कई झूले और एडवेंचर गेम्स टूटकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं. पूरे पार्क परिसर, पाथवे (चलने का रास्ता) और डैम के किनारों पर बड़ी-बड़ी कटीली झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यह खूबसूरत रिसॉर्ट जंगल की तरह दिखने लगा है. नियमित सुरक्षा और मेंटेनेंस न होने के कारण पाथवे पर रोशनी के लिए लगाए गए कई बिजली के पोल और पर्यटकों के बैठने के लिए बने शेड तक चोरी हो चुके हैं.



सोशल मीडिया पर 'हिट', हकीकत में 'फ्लॉप'

यहां घूमने आए पर्यटकों का साफ कहना है कि विज्ञापन और सोशल मीडिया पर पतरातू लेक रिसॉर्ट की आधुनिक सुविधाओं का बढ़-चढ़कर प्रचार किया जाता है, लेकिन जब लोग हकीकत में यहां आते हैं, तो या तो सुविधाएं बंद मिलती हैं या पूरी तरह बदहाल. उचित प्रबंधन, मेंटेनेंस और सुरक्षा गार्ड्स की कमी के कारण जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये पानी में बहते दिखाई दे रहे हैं. स्थानीय नागरिकों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों ने सरकार से मांग की है कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोट क्लब को तुरंत चालू किया जाए, झाड़ियों की सफाई हो, चोरी हुए पोल-शेड दोबारा लगाए जाएं और इस पूरे परिसर की सुरक्षा पुख्ता की जाए, ताकि पतरातू लेक रिसॉर्ट झारखंड के गौरव के रूप में अपनी असली पहचान वापस पा सके.


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Published by: Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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