झूमर आदिवासी परंपरा का धरोहर है : सीताराम

झूमर आदिवासी परंपरा का धरोहर है : सीताराम

उरीमारी. उरीमारी हेसाबेड़ा में करम पूजा को लेकर झूमर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. इसमें हेसाबेड़ा, रोहनगोड़ा, उरीमारी बस्ती, चेकपोस्ट, बगरैया, पहाड़ी मंदिर आदि क्षेत्र के महिलाओं व बच्चों ने भाग लिया. मुख्य अतिथि मांझी हड़ाम सीताराम किस्कू ने कहा कि झूमर नृत्य आदिवासी परंपरा का हिस्सा है. इसे बरकरार रखने के लिए हमें नयी पीढ़ी को प्रोत्साहित करना चाहिए. विस्थापित नेता महादेव बेसरा ने कहा कि क्षेत्र में आयोजित यह प्रतियोगिता हुनरमंदों को सामने लाने का काम करती है. झूमर प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आये टीमों को पुरस्कृत किया गया. मौके पर संजीव सोरेन, बंशीलाल शिगू हेंब्रम, खेमलाल मांझी, पूरन मांझी, मुनीष मांझी, लालदेव सोरेन, विकास किस्कू, मुकेश बेसरा, प्रभु किस्कू, सोमरा किस्कू, शिव मरांडी, कानू मरांडी, विनोद सोरेन, तिवारी मांझी, गीता देवी, फूलमती किस्कू, तेतरी देवी, शांति देवी, बसंती देवी, ममता देवी उपस्थित थे.

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Published by: Saroj tiwary

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