पतरातू(रामगढ़). मंगलवार को पतरातू थाना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों और गांवों में करम पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया गया. यह पर्व प्रकृति और भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है. इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष चहल-पहल और उत्सव का माहौल देखने को मिला. करमैती बहनों ने पूरे विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की.
पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवतियों ने अपने भाइयों की सुख-समृद्धि, दीर्घायु एवं परिवार की खुशहाली के लिए करम देव से सामूहिक प्रार्थना की.
गीतों की गूंज से जीवंत हुई झारखंडी संस्कृति
करम डाल, जिसे करम वृक्ष की टहनी या डाली कहा जाता है, करम पूजा का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है. इसे पूजा स्थल पर गाड़कर विधिवत पूजा की जाती है. यह प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आभार व्यक्त करने का एक जरिया है.
करम पर्व को लेकर विभिन्न गांवों में पूजा स्थलों पर पहले से ही भव्य तैयारियां की गई थीं. पूजा स्थल पर विधि-विधान से करम डाल स्थापित कर बहनों ने सामूहिक रूप से रस्में पूरी कीं. इस दौरान करमैती बहनों ने मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य-संगीत प्रस्तुत कर झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया. पूरे दिन और देर रात तक गांवों में गूंजते करम गीतों और सामूहिक नृत्य से वातावरण पूरी तरह उत्सवमय बना रहा.
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बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दिखा खासा उत्साह
इस उत्सव के माहौल में, ग्रामीणों ने आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए एक-दूसरे को शुभकामनाएं भी दीं. कई स्थानों पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आयोजन में भाग लेकर आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की.
पर्व को लेकर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में भारी उत्साह देखा गया. जैसा कि स्थानीय लोग बताते हैं, करम पूजा झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. यह हर साल समाज को प्रकृति से जोड़ता है और लोगों को एकजुट करता है.
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