गोला: रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत कोरांबे गांव के गुंदलीखरैय टोला में गुरुवार की सुबह हाथी के हमले से 49 वर्षीय बालो देवी की मौत हो गयी. मृतका सिल्ली प्रखंड के सेहदा गांव निवासी सदानंद महतो की पत्नी थीं. उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं. बालो देवी अपने पति के साथ अपने भतीजे स्व ठाकुर दास महतो के घर कृषि कार्य के लिए आयी थीं.
परिजनों के अनुसार गुरुवार सुबह करीब छह बजे बालो देवी खेत में धान का बिचड़ा उखाड़ रही थीं. इसी दौरान अचानक तीन हाथियों का झुंड खेत के समीप पहुंच गया. इससे पहले कि वह संभल पातीं, एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल बालो देवी को परिजन तत्काल घर लेकर पहुंचे, जहां कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गयी.
घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गयी और ग्रामीणों में दहशत फैल गयी. खेत की ओर गये अनीता देवी और सुरेश महतो भी हाथियों की मौजूदगी के कारण बाल-बाल बच गये. शव लेकर वन विभाग कार्यालय पहुंचे ग्रामीण घटना की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी और गोला पुलिस मौके पर पहुंची. ग्रामीणों ने मृतका के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने तथा हाथियों से सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग की.
मांग पूरी नहीं होने पर आक्रोशित ग्रामीण शव को गांव से उठाकर वन विभाग के कार्यालय पूरबडीह ले गये. वहां सीआई लक्ष्मण मुंडा, विधायक प्रतिनिधि जाकिर एवं मनोज पुजहर, मुखिया पूर्णिमा सिंह, जेएलकेएम नेता संतोष चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में लिखित समझौता हुआ. समझौते के अनुसार तीन दिनों के अंदर मृतका के परिजनों को एक लाख रुपये नगद तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चार लाख रुपये और पांच लाख रुपये फिक्स डिपॉजिट कराने का आश्वासन दिया गया.
साथ ही गांव में हाथियों के आने की सूचना मिलने पर ग्रामीणों को सुरक्षा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया. तत्काल 25 हजार रुपये दिये गये. वन विभाग की ओर से मृतका के परिजनों को तत्काल 25 हजार रुपये नगद दिये गये. सीआई लक्ष्मण मुंडा ने बताया कि जंगली हाथियों के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर सरकार की ओर से 10 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है. तत्काल 25 हजार रुपये दिये गये हैं और शेष राशि जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास किया जायेगा.
मुखिया पूर्णिमा सिंह ने कहा कि क्षेत्र में लगातार जंगली हाथियों के आगमन की सूचना पिछले कई दिनों से वन विभाग के अधिकारियों को दी जा रही थी. अधिकारियों को चाहिए था कि हाथियों को भागने को लेकर उचित उपाय निकले. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है की सूचना देने के बाद भी वन विभाग के कर्मी समय पर नहीं पहुंचते हैं. इस वजह से जान-माल की क्षति होती है.
एक वाहन और एक टीम के भरोसे हाथी भगाने का अभियान
ग्रामीणों ने हाथियों को भगाने के लिए पर्याप्त लाइट, वाहन और प्रशिक्षित टीम उपलब्ध कराने की मांग की. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल हाथी भगाने के लिए विभाग के पास एक वाहन और एक टीम है. करीब 45 हाथियों का झुंड अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहा है. गुरुवार की रात हाथियों का झुंड खोखा गांव की ओर था, जिसे वन विभाग की टीम द्वारा भगाने का प्रयास किया जा रहा था.
ग्रामीणों का कहना है कि एक साथ कई क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए एक वाहन और एक टीम पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अतिरिक्त वाहन, लाइट, प्रशिक्षित हाथी भगाओ दल और मजबूत निगरानी व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की. मौके पर वनरक्षी मनीष कुमार शर्मा, दीपक सिन्हा, दीपक दास, योगेंद्र कुमार, कैलाश महतो, दिनेश्वर बेदिया, टिकेश्वर मुंडा सहित अन्य लोग मौजूद थे.
