लीड....अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम का प्रथम स्थापना दिवस

अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम का प्रथम स्थापना दिवस रामगढ़ के जिला मैदान सिदो-कान्हो में सोमवार को संपन्न हुआ.

समाज के विकास के लिए लोगों को शिक्षा से जोड़ें रामगढ़. अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम का प्रथम स्थापना दिवस रामगढ़ के जिला मैदान सिदो-कान्हो में सोमवार को संपन्न हुआ. इस ऐतिहासिक अवसर पर 22 राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ नेपाल और भूटान के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे. असम, बिहार, बंगाल, ओडिसा, नेपाल, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आदिवासी समुदाय के हजारों लोग इस आयोजन में शामिल हुए. कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी समाज की महिलाओं द्वारा स्वागत गीत और नृत्य के साथ हुआ. मुख्य अतिथि अबुआ संथाल समाज के केंद्रीय अध्यक्ष विनोद किस्कू, महासचिव दशई मांझी और कोषाध्यक्ष दीपक टुडू ने आयोजन की शुरुआत की. तत्पश्चात सिदो-कान्हू, फूलो झानो, तिलका मांझी, चांद भैरव जैसे वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इसके बाद विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने संथाली गीत और नृत्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया. इस मौके पर केंद्रीय अध्यक्ष विनोद किस्कू ने कहा कि समाज का संगठित होकर आगे बढ़ना ही उसका वास्तविक उत्थान है. उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज में शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना अत्यंत आवश्यक है. केंद्रीय महासचिव दशई मांझी ने संथाल समाज की कुरीतियों को दूर करने और हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि संथाल समाज को अपनी परंपराओं के साथ आधुनिकता को अपनाकर आगे बढ़ना होगा. कोषाध्यक्ष दीपक टुडू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए पूर्वजों द्वारा दिये गये बलिदानों को याद किया और कहा कि अब हमें भी आगे बढ़कर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी है. उन्होंने संथाल समाज को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से मजबूत करने के लिए संगठित प्रयास करने का आह्वान किया. मौके पर केंद्रीय उपाध्यक्ष राम मोहन मुर्मू, उत्पल सोरेन, नरेश हांसदा, रामकुमार, राजेश टुडू, बहाराम सोरेन, सुरेश मुर्मू, कृष्णा सोरेन, फूलचंद हेंब्रम, दिओलाल हांसदा, सुरेश किस्कु, मोहन कुमार हांसदा, शतीस मुर्मू, दिलीप मुर्मू, सुनिल टुडू, सोनाराम हेंब्रम, बृजलाल हांसदा, अनिल मुर्मू उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में तालो हांसदा, शिकारी टुडू, कृष्णा सोरेन, सुरेश मुर्मू, विनोद सोरेन, परमेश्वर सोरेन, सोलेन हांसदा, सुबित राम किस्कू, सुखदेव किस्कू, जूरा सोरेन, मोहन पावरिया, विक्रम टुडू, खेपन मांझी, खेमलाल बेसरा, संतोष शर्मा, विजय पावरिया, तालू पावरिया, अजय टुडू, बरियत किस्कू, उषा देवी, पैमोली देवी, अम्बावती देवी, बड़की देवी, मंजू देवी, सुनीता देवी, अनिता देवी, मैनो देवी, सोनू किस्कू, नेहा किस्कू, मुर्ती देवी का योगदान रहा.

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Author: VIKASH NATH

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