उरीमारी. सावन माह की चौथी व अंतिम सोमवारी के पावन अवसर पर सयाल स्थित सिद्धेश्वर नाथ प्राचीन शिव मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान एवं वैदिक परंपरा के अनुसार रुद्राभिषेक व विशेष पूजा-अर्चना की गई. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का दर्शन किया और सुख-समृद्धि की कामना की.
वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंजा मंदिर
रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार व भगवान शिव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, दही, घी, शहद सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से अभिषेक कराया. इसके बाद भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना कर आरती की गई. पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगाए.
वैदिक विधि से संपन्न हुआ पूजन
पूजन-अर्चना का कार्य आचार्य बजेश पाठक व हरिश्चन्द्र झा ने वैदिक परंपरा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया. आचार्यों ने सावन की अंतिम सोमवारी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है.इस माह में भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है. अंतिम सोमवारी पर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है.
श्रद्धालुओं के बीच बांटा गया प्रसाद
रुद्राभिषेक व आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया.मौके पर मंदिर संचालन समिति की अध्यक्ष पम्मी कुमार अर्जुन सिंह, संदीप प्रसाद केशरी, संजय शर्मा, उदय मेहता, दीपू सिंह, सोनू मालाकार, पिंटू राय, गणेश यादव, रामकृपाल मालाकार, सोनी देवी, विभा सिंह, अनुपमा रानी, गीता सिन्हा, मुस्कान कुमारी एवं सुनीता राय उपस्थित थी.
