गोला: गोला वन क्षेत्र के महलीडीह गांव में गुरुवार देर रात जंगली हाथियों के झुंड ने खेतों में घुस कर कई किसानों की तैयार फसलों को रौंद दिया. इस घटना में कई किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. हाथियों के उत्पात से गांव में दहशत का माहौल है. ग्रामीण पूरी रात जग कर खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं.
सूचना मिलने पर मगनपुर पंचायत के मुखिया नुरुल्लाह अंसारी एवं उपमुखिया अकबर अंसारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रभावित किसानों से मिलकर नुकसान का जायजा लिया. वन विभाग से शीघ्र सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हाथी-मानव संघर्ष का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है.
हाथियों के उत्पात से झूबरी देवी, दीपनी देवी, कुशलाल महतो, राज किशोर महतो, मीना देवी और चिंता देवी की तैयार फसलें बर्बाद हो गयीं. ग्रामीणों ने बताया कि गोला वन क्षेत्र से सटे गांवों में पिछले कई महीनों से हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. आये दिन धान, मक्का व अन्य फसलों को नुकसान पहुंच रहा है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.
वन विभाग चला रहा है अभियान
वन विभाग की टीम पिछले कई दिनों से हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए लगातार अभियान चला रही है. विभागीय कर्मी रातभर निगरानी कर हाथियों को सुरक्षित दिशा में मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. वनरक्षी मनीष शर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों के करीब नहीं जाने तथा किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण के कारण हाथियों का पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हुआ है. गुरुवार रात भी मगनपुर एनएच 33 के समीप हथिनी अपने बच्चे के साथ सड़क पार करने का प्रयास करती रही, लेकिन सफल नहीं हो सकी. इसके बाद वह वापस जंगल की ओर लौट गयी.
जिले में पहले भी हो चुका है भारी नुकसान
रामगढ़ जिले के गोला, मगनपुर, बरलंगा, चितरपुर, दुलमी और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है. इस दौरान दर्जनों एकड़ में लगी धान, मक्का और सब्जियों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं. कई मकानों को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त किया है.
अलग-अलग घटनाओं में ग्रामीणों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं. वन विभाग प्रभावित परिवारों को मुआवजा देता रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर की सुरक्षा, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और स्थायी प्रबंधन के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है.
