रांची : दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद दौड़ती हुई रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल हुई महिला चीख रही थी. अपने बच्चे के बारे में पूछ रही थी. मेरा बच्चा नहीं दिख रहा. वह ठीक तो है. इधर-उधर नजर दौड़ाने के बाद महिला इमरजेंसी वार्ड के चारों तरफ भागती है. एक कोने में अपना बेटा अनमोल को देख कर वह चुप होती है. अनमोल की उम्र करीब 13 साल है. घर में कोई पुरुष न होने के कारण वह भी बारात जा रहा था.
बस दुर्घटना में उसका सिर फट गया है. चिकित्सकों ने सिर में पट्टी लगा दी है. महिला बच्चे से लिपट कर रोने लगी. पास बैठी नेहा और मोनिका ने महिला से पूछा कि उसके घर के लोग कहां हैं. नेहा के दोनों पैर में चोट लगी है. डॉक्टरों ने पट्टी बांध दी है.
नेहा ने बताया कि उसकी बहन भी साथ में बारात जा रही थी. कहीं दिख नहीं रही है, पता नहीं क्या हुआ उसके साथ. बस दुर्घटना के बाद जैसे-जैसे घायलों को रिम्स में लाया जाने लगा, वहां कोहराम मच गया. इमरजेंसी में बेड कम पड़ गये, तो घायलों को जमीन पर ही लिटा कर इलाज शुरू कर दिया गया. शाम के करीब 4.30 बजे इमरजेंसी में बेड व स्ट्रेचर पर 25 घायलों का इलाज चल रहा था, जबकि जमीन पर 14 घायल पड़े थे. उनका इलाज किया जा रहा था. जिन घायलों को हल्की चोटें आयी थीं, वह इलाज कराने के बाद हैरान-परेशान व डरे-सहमे दीवाल के सहारे कोने में बैठे हुए थे. कुछ लोग दर्द से बिलबिला रहे थे. जैसे-जैसे मरीजों का इलाज पूरा होता गया, उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया जाने लगा.
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है रिम्स के इमरजेंसी वार्ड के हालात सुधरने में ढाई घंटे से अधिक का वक्त लग गया. इमरजेंसी के एक बेड पर राहुल और अमित गाड़ी पड़े थे. दोनों दहशत में थे. राहुल टोप्पो ने बताया कि उसके साथ उसका भाई रोहन भी बारात जा रहा था. किसी ने उसे बताया था कि रोहन की मौत हो चुकी है. वह लगातार रो रहा था. लेकिन दुर्घटना में लगी चोट की वजह से वह शरीर को हिला भी नहीं पा रहा था.
