रामगढ़ : नियमों को ताक पर रख कर जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा जमीन अधिग्रहण मामले में मुआवजे का भुगतान किया गया था. धीरे-धीरे मामला ठंढे बस्ते में जाता नजर आ रहा है.
हंगामें व आंदोलन की धमकी के बाद जिला प्रशासन ने आनन-फानन में पूर्व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी लियाकत अली समेत कुछ कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज करा दी. लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराने के क्रम में कानूनी बातों को ध्यान में नहीं रखा गया. जिस दिन प्राथमिकी दर्ज करायी गयी, उसी दिन उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. बताया जाता है कि ऐसा जानबूझ कर कुछ लोगों को कानूनी लाभ पहुंचाने के लिए किया गया.
साथ ही इस मामले में तत्कालीन कानूनगो सह रामगढ़ अंचल निरीक्षक द्वारा दिये गये कारण बताओ नोटिस में दर्शाये गये अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों पर अधिकारियों द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया. कानूनगो अनिल कुमार ने लिखा था कि वे विभिन्न विधि-व्यवस्था के कार्य में अति व्यस्त रहते थे. उनके पास जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से हस्ताक्षर करवाने के बाद भुगतान वाउचर पर हस्ताक्षर करवाये जाते थे. इस क्रम में सारी भुगतान पक्रिया पूरी करने की भूमिका जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा पूरी की जाती रही है.
मामला सामने आने पर कानूनगो से पुन: 27 सितंबर को हस्ताक्षर करवाने का प्रयास किया गया. इन पर प्रधान सहायक व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के हस्ताक्षर 23 सितंबर के थे.
लेकिन कानूनगो अनिल कुमार द्वारा जब इन पर हस्ताक्षर से मना कर दिया गया तो आनन-फानन में पतरातू के अंचल निरीक्षक को जिला स्तर पर कानूनगो नामित किया तथा हस्ताक्षर करवाये गये. जबकि सरकार द्वारा घोषित अधिसूचना के अनुसार आज भी अनिल कुमार ही कानूनगो हैं. साथ ही काफी संख्या में भुगतान पंचाट में तिथि के साथ छेड़छाड़ कर तिथि बदली गयी है. नियमानुसार भुगतान पंचाट में कानूनगो के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं. पूर्व में भुगतान में ऐसा ही होता था. लेकिन कार्यालय द्वारा भुगतान पंचाट में प्रधान सहायक, सहायक व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के हस्ताक्षर से ही भुगतान कर दिया गया. कार्यालय में एक सौ से अधिक पंचाट पर कानूनगो के हस्ताक्षर नहीं हैं.
जबकि जोड़ा करम के पंचाट संख्या दो के भुगतान वाउचर पर कानूनगो अनिल कुमार से हस्ताक्षर करवाना जांच का विषय है. साथ ही सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के साथ-साथ भुगतान लेने वालों पर एक ही एफआइआर करना भी संदेह के घेरे में है. इस संबंध में बात करने पर जिला के अधिकारी कुछ भी कहने सेकतराते हैं.
