प्रभात खबर का असर: अमरदीप की नौकरी के मामले में CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान, थ्रोबॉल की मान्यता बनी अड़चन

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप की संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है. थ्रोबॉल की मान्यता न होने के कारण नौकरी देने में आ रही अड़चनों के बीच विभाग विकल्प तलाश रहा है.

Prabhat Khabar Impact: भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने वाले झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से खेल विभाग को तत्काल मामले को देखने और जरूरी कार्रवाई का निर्देश दिया.

इसके बाद खेल एवं युवा कार्य निदेशालय, झारखंड ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि विभाग ने मामले पर संज्ञान लिया है और अमरदीप के लिए खेल नीति से इतर अन्य संभावनाएं तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

हेमंत सोरेन का ट्वीट

दरअसल, प्रभात खबर डिजिटल ने अमरदीप की उस तस्वीर को सामने रखा था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीत चुके खिलाड़ी रांची के अरगोड़ा चौक पर अपने परिवार की सब्जी दुकान पर काम करते नजर आये थे. उनकी दुकान में एक ओर सब्जियां थीं, तो दूसरी ओर उनकी खेल उपलब्धियों के मेडल. इस खबर के बाद खिलाड़ी के रोजगार और भविष्य को लेकर सवाल उठे.

थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार (फोटो- सोशल मीडिया)

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नौकरी देने में सरकार के सामने क्या है अड़चन?

अमरदीप कुमार के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि झारखंड सरकार की ओर से उन्हें मदद या रोजगार देने की इच्छा के रास्ते में थ्रोबॉल की आधिकारिक मान्यता बड़ी अड़चन है.

खेल विभाग के अनुसार, थ्रोबॉल को फिलहाल इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन (JOA) से मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे में मौजूदा खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के आधार पर सरकारी नौकरी देने में तकनीकी अड़चन सामने आ रही है.

यही वजह है कि विभाग अब खेल नीति से इतर दूसरे विकल्पों की संभावना तलाश रहा है. साथ ही विभाग ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन और झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन से भी अनुरोध किया है कि थ्रोबॉल को उचित मंच और मान्यता दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए.

सरकार ने बंद नहीं किया रास्ता

इस मामले को केवल 'नौकरी नहीं देने' के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग सक्रिय हुआ है और अमरदीप के लिए उपलब्ध संभावनाओं की जांच की जा रही है.

सरकार के सामने फिलहाल दो स्तर पर काम करने की चुनौती है. पहला, मौजूदा नियमों के तहत अमरदीप को किस तरह रोजगार या दूसरी सहायता दी जा सकती है, इसकी संभावना तलाशना. दूसरा, थ्रोबॉल को मान्यता मिलने की स्थिति में खिलाड़ियों के लिए सरकारी खेल नीति के तहत मिलने वाले लाभ का रास्ता साफ होना.

विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि खेल नीति से इतर भी विकल्पों पर कार्रवाई की जा रही है. साथ ही राष्ट्रीय स्तर की खेल संस्थाओं से थ्रोबॉल को उचित मंच देने की अपील की गयी है.

चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड जीत चुके हैं अमरदीप

29 वर्षीय अमरदीप कुमार ने थ्रोबॉल में भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व किया है. वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए चार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. उनकी उपलब्धियों के बावजूद आर्थिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों में अपने पिता का हाथ बंटाना पड़ रहा है.

प्रभात खबर की पहले की रिपोर्ट में सामने आया था कि अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करते हैं. उन्होंने रोजगार के लिए कई बार आवेदन करने की बात भी कही थी.

अब मान्यता पर टिकी नजर

अमरदीप का मामला अब सिर्फ एक खिलाड़ी को नौकरी मिलने या नहीं मिलने तक सीमित नहीं रह गया है. इससे यह सवाल भी सामने आया है कि ऐसे खेलों के खिलाड़ियों को सरकारी सुविधाओं और रोजगार के दायरे में लाने के लिए मान्यता की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है.

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने कम से कम यह स्पष्ट कर दिया है कि अमरदीप के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. अब विभाग वैकल्पिक रोजगार की संभावनाएं तलाश रहा है, जबकि थ्रोबॉल को मान्यता दिलाने के लिए संबंधित खेल संस्थाओं से भी कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.

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By उज्जवल सिन्हा

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