प्रतिनिधि, मेदिनीनगर
इस प्रवृत्ति से कई खतरे पैदा होते हैं
इस प्रवृत्ति से कई खतरे पैदा होते हैं. सबसे बड़ा खतरा आग फैलने का है. गर्मी के मौसम में तेज हवा चलने से छोटी सी आग भी बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है. इसके अलावा प्लास्टिक, ग्रीस और मोबाइल ऑयल जैसे पदार्थ जलने पर जहरीला धुआं निकलता है, जिससे सांस और आंखों की बीमारियां बढ़ती हैं. धुएं और बदबू से आम नागरिक परेशान रहते हैं. यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक असुविधा भी पैदा करता है.कचरा जलाने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि और बढ़ जाती है
लोगों का तर्क है कि तेज हवा में कचरा सड़क पर फैल जायेगा, इसलिए उसे जलाना बेहतर है. लेकिन यह सोच गलत है. कचरा जलाने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि और बढ़ जाती है. कुछ लोगों का आरोप है कि नगर निगम के सफाई कर्मी भी कचरा उठाने के बजाय उसमें आग लगा देते हैं. इससे जहरीला धुआं निकलता है और आसपास के लोग परेशान होते हैं.समाधान के लिए नगर निगम को ठोस कदम उठाने होंगे
समाधान के लिए नगर निगम को ठोस कदम उठाने होंगे. नियमित कचरा उठाव और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण जैसे कम्पोस्टिंग, रीसाइक्लिंग और लैंडफिल प्रबंधन को अपनाना चाहिए. साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाना होगा कि कचरा जलाना खतरनाक है. खुले में कचरा जलानेवालों पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है. मोहल्ला स्तर पर गीला और सूखा कचरा अलग‑अलग करके निपटान की व्यवस्था करनी होगी.समाज के प्रबुद्ध लोगों ने भी इस पर रोक लगाने की मांग की है. यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो इस प्रवृत्ति को बदला जा सकता है. कचरा जलाना कोई समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा करने वाला कदम है. सही निस्तारण ही सुरक्षित और स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता है.
