रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पलामू जिले के पाटन प्रखंड के निमियां टूसरा गांव में सरकारी सिस्टम की लापरवाही के कारण सुनिता को सरकारी आवास नहीं मिला था. इस वजह से सुनीता देवी अपने परिवार के साथ प्लास्टिक डालकर जर्जर घर में रहने को मजबूर है. इसी टूटे घर में रहने के दौरान कुछ दिन पूर्व उसकी बेटी को सांप ने डंस लिया, जिससे उसकी मौत हो चुकी. सरकारी योजनाओं की नाकामी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता के कारण एक गरीब मां की गोद सूनी हो गयी है.
प्लास्टिक के फटे छप्पर में तीन बार डंसा, अस्पताल में तोड़ा दम
गरीबी से बेबस सुनीता देवी का आशियाना कम और जहरीले जीवों का बसेरा ज्यादा बन चुका है.बीते दिनों वह अपनी बेटी के साथ खाना खा रही थीं, तभी एक जहरीले सांप ने बच्ची के पैर में डंस लिया. मां ने हिम्मत दिखाकर सांप को खींचकर फेंका, लेकिन उसने दोबारा और तिबारा बच्ची को शिकार बना लिया. आनन-फानन में उसे पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में मेदिनीनगर स्थित एमएमसीएच रेफर किया गया.अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस त्रासदी को 25 दिन बीत चुके हैं, पर शासन-प्रशासन का कोई नुमाइंदा पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने नहीं आया.
मुखिया ने बेबसी का उड़ाया मजाक
सुनीता देवी ने रोते हुए बताया कि उन्होंने पक्का आवास पाने के लिए प्रखंड कार्यालय से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों के दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटे.जब उन्होंने मुखिया से अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई, तो मदद के बजाय उन्हें टका सा जवाब मिला. मुखिया ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मैं गलत काम नहीं करता, मैं एक ईमानदार मुखिया हूं. इस संवेदनहीन रवैये पर पीड़ित मां ने तीखा सवाल दागा है,अगर मुखिया ईमानदार हैं, तो क्या सिर पर छत न होने के कारण जनता बेईमान हो गयी? जनप्रतिनिधि मदद करने के बजाय हमारे आवास की स्वीकृति में रोड़े अटका रहे हैं.
लाचार मां को अब सिर्फ भगवान पर भरोसा
गरीब और असहाय सुनीता देवी का कहना है कि वह इतनी कमजोर हैं कि किसी रसूखदार तंत्र या नेताओं से लड़ नहीं सकतीं. लेकिन उन्हें ऊपर वाले के इंसाफ पर पूरा भरोसा है. उन्होंने सिसकते हुए कहा कि मैं तो गरीब हूँ, किसी को कुछ नहीं बोल पाऊंगी. लेकिन ईश्वर सब देख रहा है, उसके घर देर है अंधेर नहीं. लोगों का कहना है कि यह दर्दनाक वाकया पाटन प्रखंड में चल रही कल्याणकारी योजनाओं के खोखले दावों और धरातल पर दम तोड़ती मानवता की एक जीती-जागती और खौफनाक हकीकत है.
तकनीकी पेंच है: मुखिया
केल्हार पंचायत के मुखिया जैनुल सिद्दीकी का कहना है कि सुनीता देवी का आवास काफी जर्जर स्थिति में है. आवास पाने के योग्य हैं, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से आवास उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2012 उनकी सास के नाम से आवास आवंटन हुआ था.
