जेल से छूटे 117 दागियों की एसपी कपिल चौधरी ने लगाई क्लास, कुंडली खंगालकर दी आखिरी चेतावनी

पलामू पुलिस एक्शन मोड में है. रविवार को चैनपुर थाना परिसर में 117 दागियों की परेड बुलाई गई. एसपी कपिल चौधरी ने खुद कमान संभाली और अपराधियों से बातचीत कर उन्हें सुधरने की अंतिम चेतावनी दी.


Palamu SP Class: पलामू जिले में विधि-व्यवस्था को चाक-चौबंद करने, अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने और आम जनता को सुरक्षित माहौल देने के लिए पुलिस प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है. इसी कड़ी में पलामू पुलिस के आला अधिकारियों के विशेष निर्देश पर रविवार को चैनपुर थाना परिसर में एक बेहद संवेदनशील और बड़े पैमाने पर थाना परेड का आयोजन किया गया. इस परेड में चैनपुर और आसपास के इलाकों के उन सभी दागियों को तलब किया गया था, जो विभिन्न संगीन आपराधिक मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर या सजा काटकर बाहर घूम रहे हैं.

सुबह से ही जुटने लगे थे अपराधी

थाना परिसर में सुबह से ही अपराधियों का जुटना शुरू हो गया था. देखते ही देखते वहां 117 दागियों का महाजुटान हो गया. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कपिल चौधरी खुद चैनपुर थाना पहुंचे और कमान संभाली. उन्होंने पारंपरिक पुलिसिया ढर्रे से हटकर, बेहद कड़े और सुधारात्मक अंदाज में एक-एक अपराधी से आमने-सामने बातचीत की. एसपी ने सभी अपराधियों के वर्तमान निवास, उनके रोजगार के साधन, उनकी संगति और उनकी रोजाना की गतिविधियों की गहन समीक्षा की.

क्राइम चार्ट: हथियार और मर्डर के सौदागर सबसे अधिक

चैनपुर थाना पुलिस द्वारा तैयार किये गये डेटाबेस के अनुसार, परेड में हाजिर हुए 117 अपराधियों का वर्गीकरण चौंकाने वाला है. इसमें सबसे बड़ी संख्या अवैध हथियार रखने और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में शामिल रहे आरोपियों की थी. आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार/फायरिंग) के 33 व्यक्ति,हत्या (मर्डर केस के आरोपी)26,लूट व छिनतई (रोबरी के मामले)15,चोरी व नकबजनी (घर का ताला तोड़ना) 15,अन्य संगीन मामले (विवाद/मारपीट)28 शामिल थे.

अपराध की राह में सिर्फ बर्बादी

परेड के दौरान पलामू एसपी कपिल चौधरी का रुख बेहद सख्त और आक्रामक नजर आया. उन्होंने उपस्थित सभी 117 व्यक्तियों को कड़े शब्दों में हिदायत देते हुए कहा कि अपराध की दुनिया का अंत सिर्फ और सिर्फ तबाही है. एसपी ने कड़े लहजे में कहा कि जो रास्ता आपने अतीत में चुना था, वह न केवल आपके जीवन को नर्क बनाता है, बल्कि आपके मासूम बच्चों, पत्नी और बूढ़े माता-पिता के भविष्य को भी अंधकार में धकेल देता है. समाज में सिर उठाकर जीना है, तो इस काले दलदल से बाहर निकलिए. अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझिए, मेहनत-मजदूरी करिए और इज्जत की रोटी खाइये.

एसपी ने दागियों को दी अंतिम अल्टीमेटम

एसपी ने इसके साथ ही अंतिम चेतावनी (अल्टीमेटम) देते हुए कहा कि कानून का पालन करना और शांतिपूर्ण जीवन जीना ही अब आपके पास एकमात्र रास्ता बचा है. अगर दोबारा पलामू जिले के किसी भी कोने में आपकी संदेहास्पद गतिविधि पाई गयी, या किसी वारदात में आपका नाम आया, तो पलामू पुलिस बिना कोई रहम दिखाए आपको सीधे सलाखों के पीछे भेजेगी. कानून का हाथ बहुत लंबा होता है, इसलिए सुधर जाएं वरना अगली जगह सिर्फ जेल होगी.

थाना परिसर छावनी में तब्दील

इस हाई-प्रोफाइल और बेहद संवेदनशील पुलिसिया कार्रवाई को लेकर चैनपुर थाना परिसर और आसपास के इलाके को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया था. सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद था.मौके पर मुख्य रूप से अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश कुमार यादव, चैनपुर थाना प्रभारी लालजी, अंचल के कई सर्किल इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, सशस्त्र बल के जवान, खुफिया विभाग के कर्मी और ग्रामीण क्षेत्रों से बुलाये गये चौकीदार उपस्थित रहे. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन सभी 117 दागियों का एक विशेष डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है. इनके फिंगरप्रिंट और वर्तमान तस्वीरें भी रिकॉर्ड में दर्ज की गयी हैं. अब इन सभी के घरों पर पुलिस की 'क्विक रिस्पांस टीम' समय-समय पर औचक छापेमारी कर इनकी उपस्थिति की जांच करेगी.

क्या है पलामू पुलिस का 'मास्टर प्लान'?

पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस थाना परेड के पीछे जिला पुलिस की तीन-स्तरीय रणनीति काम कर रही है.

  • सख्त सर्विलांस: जेल से बाहर आने के बाद अपराधी क्या काम कर रहे हैं, उनका खर्च कैसे चल रहा है और वे वापस अपने पुराने गैंग या नए अपराधियों के संपर्क में हैं या नहीं, इसकी पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और डोजियर तैयार करना.
  • क्राइम प्रिवेंशन (वारदातों पर रोक): त्योहारों के मौसम और हाल के दिनों में पलामू के विभिन्न क्षेत्रों में हुई चोरी, छिनतई और गोलीबारी की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इन दागियों का भौतिक सत्यापन करना बेहद जरूरी था.
  • पुनर्वास का प्रयास : पुलिस का मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि सुधारना भी है. जो अपराधी सचमुच अपराध का रास्ता छोड़कर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं, उन्हें पुलिस प्रशासन सही राह दिखाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेगा.


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By Chandra shekhar singh

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