सतबरवा और आसपास के इलाकों में बकरीद का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. जामा मस्जिद सतबरवा, ताहा मस्जिद करमा, चांपी, बकोरिया, ताबर, बारी सहित पोलपोल और झाबर गांव की मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की. नमाज के बाद सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया. जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तौफीक आलम मिस्बाही ने कहा कि असली कुर्बानी जानवरों की बलि नहीं, बल्कि अपने भीतर की नफरत और घमंड जैसी बुराइयों को त्यागने का नाम है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी को पीड़ा पहुंचाकर खुशी मनाना जायज़ नहीं है. करमा गांव के मौलाना मुफ्ती इकबाल ने बकरीद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह त्योहार हजरत इब्राहिम के अल्लाह के प्रति अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है.
इस मौके पर प्रखंड प्रमुख रीमा देवी, जिला परिषद सदस्य सुधा कुमारी, उप प्रमुख कामाख्या नारायण यादव, पूर्व जिला परिषद सदस्य चिंता देवी, मुखिया संघ के अध्यक्ष गिरवर प्रसाद राम, पूर्व उप प्रमुख अशोक राम, मुखिया निरोतमा कुमारी, संतोष उरांव सहित शाहनवाज आलम, नौशाद आलम, मोहम्मद दिलनवाज आलम, मोहम्मद अताउलाह, ताहिर फिरोज, मोहम्मद अदनान अशरफ, अबुल हसन जुम्मन मियां, शमशाद अंसारी और मोहम्मद अफजल अंसारी ने शुभकामनाएं दीं.
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