पलामू : पाटन का एक मात्र बालिका उच्च विद्यालय कागज पर संचालित, 1982 में बना प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका विद्यालय खंडहर में तब्दील

पलामू के पाटन में प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय वर्षों से बंद है। भवन जर्जर और शिक्षक नदारद हैं, फिर भी कागजों पर विद्यालय संचालित हो रहा है।

रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट पलामू. जिले के पाटन प्रखंड में बालिकाओं के लिए एक मात्र प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय है. पिछले कई वर्षों से ताला लटक रहा है. विद्यालय में न शिक्षक हैं और तो छात्राएं. लेकिन विद्यालय कागज पर संचालित है. भवन बदहाल व जर्जर हो गया है. चहारदीवारी के अंदर खाली पड़े जमीन में बड़े- बड़े घांस उग गये हैं. जहरीले जंतुओं का बसेरा बन गया है. इसे देखने वाला कोई नहीं है.

तीन बार विद्यालय भवन निर्माण हुआ था

विद्यालय का तीन बार भवन बना था. पहली बार वर्ष में एलजीपी मद की राशि से भवन का निर्माण कराया गया था. दूसरी बार सरकार की ओर से भवन का निर्माण कराया गया था. तीसरी बार विधायक निधि की राशि से दो कमरा का निर्माण कराया गया था. लेकिन लाखों रूपये की लागत निर्मित भवन धूल फांक रही है. विद्यालय भवन खंडहर में तब्दील हो गया है. विषैले जीव-जंतुओं का बसेरा हो गया है. वहीं छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में परेशानी हो रही है. इसे देखने, पूछने वाला कोई नहीं है.

पुरानी पाटन में वर्ष 1982 में स्थापित हुआ था

प्रखंड मुख्यालय में प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी. इसे सुचारू रूप से संचालित करने उद्देश्य से विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा नौ शिक्षक, दो आदेशपाल और एक लिपिक की बहाली की गयी थी. इन्हीं नियुक्त एक शिक्षक (बृजमोहन मिश्रा), एक लिपिक (विजय सिंह) व दो आदेशपाल (देवेंद्र राम व मुक्तेश्वर सिंह) की सेवा को सरकार द्वारा मान्यता दी गयी. जिसका नियमित रूप से भुगतान भी किया गया.

शिक्षक, कर्मी व छात्रा एक भी नहीं

लेकिन वे लोग सेवानिवृत हो गये. इसके बाद सुरेंद्र पांडेय व कलीम खान की पदस्थापन की गयी. लेकिन कलीम खान का आकस्मिक निधन हो गया और सुरेंद्र पांडेय अन्यत्र विद्यालय में अपना स्थानांतरण कराकर चले गये. विद्यालय में कोई भी न तो शिक्षक हैं और न कोई कर्मी. ये भी पढ़ें: पलामू: पाटन रूट पर बिजली संकट गहराया, 20 मेगावाट की जगह मिल रहा 5 मेगावाट, 5 ग्रिड फेल

अंतिम बार 2018 में घोषित हुआ था परीक्षाफल

प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय का अंतिम बार वर्ष 2018 में छात्राओं ने परीक्षा लिखी थी. अंतिम बार 2018 में परीक्षाफल घोषित हुआ था. इसके बाद विद्यालय में शैक्षणिक कार्य बंद है. विद्यालय में वर्ष 2023 से ताला लटक रहा है. रख रखाव के अभाव में भवन जर्जर हो गया है. भवन का खिड़की दरवाजा गायब है. कमरा के अंदर व बाहर घांस फूस का अंबार लगा हुआ है.

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जिला शिक्षा पदाधिकारी ने किया था निरीक्षण

पिछले वर्ष नवंबर दिसंबर में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सौरभ प्रकाश ने निरीक्षण किया था. इस दौरान उन्होंने विद्यालय को बहुत जल्द खुलवाने और शिक्षण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था. लेकिन सिर्फ आश्वासन तक ही सिमट कर रह गया. इसके बाद उनका यहां से स्थानांतरण हो गया.

कागज पर संचालित है विद्यालय

पाटन प्रोजेक्ट सरस्वती बालिका उच्च विद्यालय कागज पर संचालित है. लेकिन धरातल पर ठीक बिल्कुल इसका उल्टा है. धरातल पर विद्यालय बंद है. सभी भवन बिल्कुल जर्जर हो गया है.


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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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