पलामू जिला के पांडू प्रखंड मुख्यालय के ग्रामीण पिछले चार दशकों से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. वर्ष 1984 में बनी पांडू ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना विभागीय लापरवाही और गलत तकनीकी आकलन के कारण आज तक अधर में लटकी हुई है. कठोर चट्टानों पर बसे इस क्षेत्र में पारंपरिक जलस्रोत काम नहीं करते. योजना निर्माण के समय कोई भूगर्भीय सर्वेक्षण नहीं कराया गया और बिना जलस्रोत की जांच किये ही इंटेकवेल बना दिया गया. परिणामस्वरूप, पिछले 40 वर्षों में कई योजनाएं बनीं और सरकारी फंड खर्च हुआ, लेकिन जनता को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ. वियर निर्माण की डीपीआर तैयार है, लेकिन विभागीय अभियंता के पास लंबित है बांकी नदी में पानी के ठहराव के लिए वियर निर्माण की डीपीआर तैयार है, लेकिन यह तकनीकी स्वीकृति के लिए विभागीय अभियंता के पास लंबित है. पांडू खैरा विकास मंच के अध्यक्ष ललन प्रसाद पांडेय ने उपायुक्त को मांग पत्र सौंपकर वियर निर्माण की मंजूरी और बंद पड़ी योजना को तकनीकी सुधार कर तत्काल शुरू करने का अनुरोध किया है. उनका कहना है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर लंबित डीपीआर को बिना देरी मंजूरी दी जाए, ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल सके. 30 जून से पांडू प्रखंड कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगे. 75 वर्षीय ललन प्रसाद पांडेय ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि कुछ दिनों के भीतर प्रस्तावित वियर निर्माण की स्वीकृति और काम शुरू नहीं किया गया, तो वे 30 जून 2026 से पांडू प्रखंड कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगे. इससे पहले भी 17 जून 2025 को उन्होंने अनशन किया था, जिसे कार्यपालक अभियंता के आश्वासन पर समाप्त किया गया था, लेकिन परिणाम शून्य रहा.
40 वर्षों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं पांडूवासी
40 वर्षों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं पांडूवासी
