पलामू . पलामू सांसद वीडी राम ने कहा कि संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है. लोकसभा ने 12 अगस्त और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को विधेयक पारित किया. इसका उद्देश्य खनिज क्षेत्र में स्थिर, पारदर्शी और पूर्वानुमेय व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिससे खनन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवाहरिता बनी रहे और नये निवेश को प्रोत्साहन मिल सके.
झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्य
सांसद श्री राम सोमवार को शांतिपुरी स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है. सरकारी दस्तावेज के अनुसार राज्य के 24 जिलों में जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) के माध्यम से करीब 19 हजार करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके है. इस राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है. राजस्व, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है.
11 वर्षों में राज्य में केवल 11 खनिज ब्लॉकों की नीलामी
खनिज ब्लॉकों के परिचालन के मामले में झारखंड के सामने बड़ी चुनौती भी है. पिछले 11 वर्षों में राज्य में केवल 11 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई और अब तक नीलाम किये गये किसी भी ब्लॉक का परिचालन शुरू नहीं हो सका है. ओडिशा में नीलाम किये गये 79 ब्लॉकों में से 35 का परिचालन शुरू हो चुका है. ऐसे में झारखंड के लिए तेजी से नीलामी, अन्वेषण और परिचालन सुनिश्चित करना बड़ा अवसर है.
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राज्यों के खनिज राजस्व में कटौती नहीं
सांसद ने कहा कि विधेयक को लेकर राज्यों के राजस्व पर असर संबंधी आशंकाओं के बीच सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि राज्यों के मौजूदा खनिज राजस्व में कटौती नहीं होगी. वर्ष 2025-26 में कोयला और गैर-कोयला खनिजों से राज्यों को 1,14,549.28 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि केंद्र का राजस्व 14,833.81 करोड़ रुपये रहा. यानी कुल राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी करीब 88.53 प्रतिशत रही. वर्ष वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच राज्यों के खनिज राजस्व में करीब 354 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई है. संशोधन के बाद भी राज्यों को खनिज उत्पादन से प्राप्त राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा.
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डीएमएफ से स्थानीय विकास को मिलेगी मजबूती
झारखंड में करीब 19 हजार करोड़ रुपये के डीएमएफ संग्रह को खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है. इस राशि का प्रभावी इस्तेमाल पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, कौशल विकास और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. खनिज संपदा वाले आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में यदि DMF राशि का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाता है तो खनन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय आबादी तक पहुंचाया जा सकता है.
रोजगार और औद्योगिक निवेश की संभावना
खनन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का बड़ा स्रोत है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार देश में कोयला क्षेत्र पांच लाख से अधिक तथा गैर-कोयला खनिज क्षेत्र एक करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। झारखंड में खनिज ब्लॉकों का समयबद्ध परिचालन शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ परिवहन, ठेका सेवाओं, छोटे कारोबार और अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
खनिज आधारित उद्योगों को भी लाभ
झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और चूना पत्थर सहित अनेक खनिज उपलब्ध हैं। इन खनिजों का उपयोग इस्पात, सीमेंट, बिजली, एल्युमिनियम और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में होता है। स्थिर और पूर्वानुमेय व्यवस्था से खनिज आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ाने तथा राज्य में प्रोसेसिंग बेनिफिकेशन और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग को विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं.
समयबद्ध परिचालन सबसे बड़ी जरूरत
झारखंड के लिए चुनौती यह है कि नीलामी तक सीमित रहने के बजाय खनिज ब्लॉकों का समयबद्ध परिचालन सुनिश्चित किया जाय. इसके लिए नये ब्लॉकों की पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीक से अन्वेषण, निवेश आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर देना होगा. विशेषज्ञों के अनुसार खनिज संसाधनों का केवल उत्खनन करने के बजाय राज्य में खनिज आधारित प्रसंस्करण और विनिर्माण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तो रोजगार और राजस्व दोनों में वृद्धि की संभावना अधिक होगी.
आगे की प्राथमिकताएं
झारखंड में एमएमडीआर संशोधन विधेयक से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों का शीघ्र परिचालन, नए ब्लॉकों की पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीक से अन्वेषण, खनिज आधारित उद्योगों में निवेश, स्थानीय युवाओं के लिए कौशल एवं रोजगार और डीएमएफ की राशि का प्रभावी उपयोग प्राथमिकता होनी चाहिए.
राजस्व, रोजगार, औद्योगिक विकास में बदलाव आयेगा
एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को झारखंड के लिए केवल कर व्यवस्था में बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि खनिज संसाधनों को राजस्व, रोजगार, औद्योगिक विकास और स्थानीय कल्याण में बदलने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है. राज्य के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने खनिज संसाधनों का पारदर्शी, वैज्ञानिक, पर्यावरण-सम्मत और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने की है.
