रमेश रंजन की रिपोर्ट पलामू. जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित सतबरवा प्रखंड के मुरमा कठौतिया मलय डैम तीन प्रखंड क्षेत्र के किसानों के लिए लाइफ लाइन मानी जाती है, जिससे किसानों के खेतों में हरियाली के साथ-साथ उनके घरों में खुशिहाली आती है. पिछले दो दिनों के मूसलाधार वर्षा से 18 फीट पानी का बढ़ोतरी हुआ है विभाग के कनीय अभियंता हृदय कुमार ने बताया कि तत्काल डैम में 38 फीट पानी उपलब्ध है.
पानी के बढ़ोतरी से किसानों के चेहरे पर खुशी
पानी के बढ़ोतरी से किसानों के चेहरे पर खुशी झलक रही है. पिछले दिनों मुख्य नहर के चैन संख्या 18 सतबहिनी के समीप क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण किसानों को धान रोपनी के पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा जिसको लेकर किसानों ने महापंचायत का आयोजन किया. किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत तथा पांकी विधायक कुशवाहा डॉ शशी भूषण मेहता स्थल का दौरा कर अभिलंब दुरुस्त करने के लिए विभाग को आदेश दिया.
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19200 हैक्टेयर भूमि को संचित करने का लक्ष्य
जिसके परिणाम स्वरूप क्षतिग्रस्त नहर का मरम्मत कार्य हो सका. नहर के मरम्मत होने के बाद सतबरवा लेस्लीगंज तथा सदर मेदिनीनगर प्रखंड के लगभग 105 गांव के किसानों के खेतों तक पानी पहुंच रहा है. इस डैम के पानी से 19200 हैक्टेयर भूमि को संचित करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए नौ शाखा नहर भी बनाया गया है.
पूर्व मंत्री पूरन चंद के प्रयास से हुआ था निर्माण
एकीकृत बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री रहे डाल्टनगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरनचंद (अब स्वर्गीय) के दूरदर्शी सोच तथा प्रयास के परिणाम स्वरूप 1972 में मलय जलाशय योजना का आधारशिला रखा गया . जिसके परिणाम स्वरूप 80 के दशक डैम में बनकर तैयार हुआ.आज यह डैम किसानों के लिए वरदान के रूप में साबित हो रहा है.
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राजनीतिक मुद्दा में भी शामिल रहता है मलय डैम
डाल्टनगंज विधानसभा के पूर्वी क्षेत्र के मतदाताओं को रिझाने के लिए चुनाव के समय डैम के सुंदरीकरण, पर्यटन के रूप में विकसित करने, विस्तारीकरण समेत अन्य मुद्दे को लेकर राजनेता काफी प्रयास करते हैं जिसका समय-समय पर लाभ ही मिलता है. डैम की मरम्मत, फाटक लगाने जैसे मुद्दे को लेकर झारखंड के प्रथम स्पीकर इंदर सिंह नामधारी, अनिल चौरसिया, (अब स्वर्गीय) पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी ,विधायक आलोक चौरसिया समेत के नेता जन आंदोलन करते रहे हैं जिसका लाभ भी उन्हें मिलता है.
