सिक्का गांव की रहस्यमयी मौतों पर केएन त्रिपाठी का सरकार पर हमला, स्वास्थ्य व्यवस्था को बताया विफल

Palamu News: पलामू के सिक्का गांव में एक परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी मौतों पर पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने मौत का कारण सार्वजनिक करने, मेडिकल बुलेटिन जारी करने, उच्चस्तरीय जांच, पीड़ित परिवार को मुआवजा और बेहतर इलाज की मांग की.

पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमय मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद सरकार पूरी तरह असंवेदनशील बनी हुई है और अब तक किसी भी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता का उदाहरण है. यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी.

परिवार में पांच की मौत, एक अस्पताल में भर्ती

पूर्व मंत्री ने बताया कि सिक्का गांव के जिस परिवार में यह घटना हुई, उसमें कुल आठ सदस्य थे. इनमें से पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक सदस्य अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. परिवार के दो सदस्य केवल इसलिए सुरक्षित बच गए क्योंकि घटना के समय वे गांव से बाहर थे. उन्होंने कहा कि यदि वे भी गांव में मौजूद होते तो संभव है कि वे भी इस रहस्यमयी घटना का शिकार हो जाते. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाती है.

मौत का कारण छिपाने का लगाया आरोप

केएन त्रिपाठी ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर मौत के वास्तविक कारण को सार्वजनिक नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब परिवार के शुरुआती दो सदस्यों को इलाज के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमएमसीएच) में भर्ती कराया गया था और वहां उनकी मौत हुई, तभी प्रशासन को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए था कि मौत किस कारण हुई. उन्होंने कहा कि इसके बाद दो अन्य लोगों की मौत रांची स्थित रिम्स में भी हो गई, लेकिन आज तक न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही जिला प्रशासन ने कोई स्पष्ट जानकारी दी. इस कारण पूरे गांव में भय और भ्रम का माहौल बना हुआ है.

आधिकारिक बुलेटिन जारी करने की मांग

पूर्व मंत्री ने मांग की कि राज्य सरकार, पलामू के उपायुक्त और सिविल सर्जन तत्काल इस मामले में आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी करें. उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि आखिर इन मौतों की वजह क्या थी. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार पारदर्शिता नहीं अपनाएगी, तब तक तरह-तरह की अफवाहें फैलती रहेंगी और ग्रामीणों में दहशत बनी रहेगी. ऐसे संवेदनशील मामलों में सूचना छिपाने के बजाय तथ्य सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है.

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

केएन त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि झारखंड का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह बदहाल हो चुका है. उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि राज्य के अधिकांश सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आश्चर्य जताया कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी गांव में अब तक किसी विशेषज्ञ मेडिकल टीम को जांच के लिए नहीं भेजा गया. उनके अनुसार, यदि किसी संक्रमण, विषाक्तता या अन्य कारण की आशंका है तो उसकी तत्काल वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी साधा निशाना

पूर्व मंत्री ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार नहीं किया जाता और इलाज की बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. उन्होंने हाल की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक मरीज को हार्ट अटैक आने के बावजूद अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी. आरोप लगाया कि ऑक्सीजन देने के बजाय मरीज को केवल नेबुलाइजर लगाया गया, जिससे उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं.

लोग अंधविश्वास का सहारा लेने को मजबूर

केएन त्रिपाठी ने कहा कि जब सरकारी तंत्र और चिकित्सा व्यवस्था मौत का कारण बताने में असफल रहती है, तब ग्रामीण मजबूरी में झाड़-फूंक और अंधविश्वास का सहारा लेने लगते हैं. उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की विफलता को दर्शाती है, क्योंकि वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि लोगों को अंधविश्वास से बाहर निकालने की जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन जब प्रशासन ही निष्क्रिय हो जाए तो ग्रामीणों के पास सीमित विकल्प बचते हैं.

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पीड़ित परिवार को मुआवजा और उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार से मांग की कि मृतकों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और अस्पताल में भर्ती बीमार सदस्य का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने सिक्का गांव में रहस्यमयी मौतों की जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की उच्चस्तरीय टीम भेजने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक मौतों का वास्तविक कारण सामने नहीं आता और गांव के लोगों को भरोसा नहीं दिलाया जाता, तब तक भय का माहौल समाप्त नहीं होगा. सरकार को इस मामले में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके.

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लेखक के बारे में

By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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