रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पाटन (पलामू): जिले के पाटन प्रखंड के मेराल आदिवासी बहुल गांव में करम पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है. सोमवार की रात से ही गांव की महिलाएं, युवतियां और बच्चे पर्व को लेकर उत्साहित हैं. अपनी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामीण दो दिनों तक करमा पर्व धूमधाम से मनाते हैं. मेराल पंचायत की पूर्व मुखिया अनिता देवी ने बताया कि प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक करम पर्व गांव में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. पर्व को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं. महिलाओं ने करम डाली की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा भाई-बहन के बीच प्रेम और सौहार्द की कामना की.
पारंपरिक गीतों पर देर तक हुआ नृत्य
पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने पारंपरिक गीतों पर सामूहिक नृत्य किया और पर्व की खुशियां साझा कीं. महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पूजा स्थल पर पहुंची और विधि-विधान के साथ करम देव की पूजा की. इसके बाद ढोल-मांदर और पारंपरिक गीतों की धुन पर महिलाओं ने देर तक नृत्य किया. नृत्य और गीत के दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला. गांव की युवतियों और महिलाओं ने एक साथ पर्व की परंपरा को आगे बढ़ाया. करमा पर्व को लेकर गांव में भव्य तैयारियां की गयी है. ग्रामीणों के अनुसार, यह झारखंड के प्रमुख पारंपरिक पर्वों में से एक है.
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प्रकृति और कृषि से जुड़ा है करम पर्व
अनिता देवी ने बताया कि करम पर्व प्रकृति और कृषि से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही यह भाई-बहन के अटूट प्रेम और आपसी रिश्तों की मजबूती का संदेश देता है. पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और सम्मान भी प्रकट करते हैं.
झारखंड की लोक संस्कृति की पहचान है करम पर्व
सुचिता देवी ने कहा कि करम पर्व झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा की पहचान है. पर्व के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने के साथ पारंपरिक गीत और नृत्य के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवंत रखती हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के पर्व सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि करम पर्व का मुख्य कार्यक्रम बुधवार को पूजा-अर्चना और पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगा. मौके पर फूलमती देवी, सरिता देवी, शांति देवी, संगीता देवी, उषा देवी, पुनीता देवी, मानती देवी, गीता देवी, रेखा देवी, अवधेश सिंह चेरो, जयराम सिंह चेरो, विकास कुमार मेहता समेत दर्जनों महिलाएं मौजूद थी. सभी ने पारंपरिक गीतों पर नृत्य में हिस्सा लेकर पर्व की खुशियां मनाई.
