पलामू जिले में अवैध बालू कारोबार की स्थिति बेहद चिंताजनक है. एनजीटी की रोक के बावजूद जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नदी घाटों से खुलेआम बालू का उत्खनन, परिवहन और भंडारण किया जा रहा है. कोयल और अमानत नदी सहित कई स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 10 बजे तक ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू उठाव होता है. इसके बाद बालू को सुरक्षित जगहों पर डंप कर ऊंची कीमत पर बेचा जाता है. इस अवैध कारोबार से नदियों का अस्तित्व खतरे में है और स्थानीय लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है.
दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती हैरात्रि में ट्रैक्टरों की तेज आवाज़ से गली-मुहल्लों के लोग परेशान रहते हैं. नींद पूरी न होने से स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है. तेज गति से ट्रैक्टर चलने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, जिससे माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है. कई बार माफिया लोगों से लड़ने-झगड़ने को भी तैयार हो जाते हैं.
अमानत नदी से रातभर 15 से 20 ट्रैक्टर बालू उठाकर दूसरी जगहों पर भंडारण करते हैंनगर निगम क्षेत्र के चैनपुर, शाहपुर, सेमरटांड, बैंक कॉलोनी, नयी मुहल्ला शाहपुर, बैरिया, नीमियां, सुदना, रेड़मा, बारालोटा आदि इलाकों में मकान निर्माण के लिए बालू डंप किया जा रहा है. ग्रामीण इलाकों में भी नदी घाटों से चोरी कर बालू उठाव जारी है. सदर प्रखंड के रजवाडीह पंचायत के मुखिया अनुज त्रिपाठी ने प्रशासन से इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने बताया कि बड़कागांव स्थित अमानत नदी से रातभर 15 से 20 ट्रैक्टर बालू उठाकर दूसरी जगहों पर भंडारण करते हैं. शाम होते ही यह काम शुरू हो जाता है और सुबह तक चलता है.
प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ हैलोगों का कहना है कि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. इस कारण आम जनता में असंतोष व्याप्त है. गर्मी और ट्रैक्टरों की आवाज़ से लोगों का जीना मुहाल हो गया है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. माफिया मॉनसून आने से पहले नदी किनारे या सुरक्षित जगहों पर बालू का भंडारण करने में जुटे हैं.
